{"_id":"5f7e051e8ebc3e9b8a159eb4","slug":"no-more-terrorists-throng-the-martyrs-in-the-valley-shrinagar-news-jmu220286022","type":"story","status":"publish","title_hn":"घाटी में अब आतंकियों नहीं शहीदों के जनाजे में उमड़ती है भीड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घाटी में अब आतंकियों नहीं शहीदों के जनाजे में उमड़ती है भीड़
विज्ञापन
श्रीनगर में शहीद मोहम्मद अल्ताफ के जनाजे में बुधवार को बिलखते परिजन। संवाद
- फोटो : SHRINAGAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। कश्मीर घाटी में अब फिजा में बदलाव देखने को मिल रहा है। वो कश्मीर जहां हर आतंकी के जनाजे में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ती थी, राष्ट्र विरोधी नारेबाजी हुआ करती थी। आज उसी कश्मीर में शहीद जवानों के जनाजों में सैकड़ों लोग शामिल होते दिखाई पड़ते हैं।
हालांकि, कश्मीर में कोरोना महामारी के चलते लोगों को एक जगह जमा होने पर पाबंदियां लगाई गई है, लेकिन इसके बावजूद लोग अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते। ऐसी ही एक मिसाल जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के श्रीनगर के ईदगाह स्थित घर पर बुधवार को देखने को मिली, जब उनके जनाजे में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे। कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन मंगलवार शाम गांदरबल जिले के नुनर इलाके में भाजपा नेता को बचाने में आतंकियों की गोली का शिकार हो गए थे।
जनाजे में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि अल्ताफ मेरा भाई था जिसने अपनी जान अपने फर्ज के लिए न्योछावर कर दी है। हमें उसकी शहादत पर गर्व है। उसने कहा कि अल्ताफ एक जिंदा दिल इंसान था और हमेशा से ही उसे पुलिस में जाने का शौक था। पिछले कुछ समय से भाजपा नेताओं को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद परिवार वालों ने कई बार उसे भाजपा नेताओं के साथ न रहने की सलाह दी थी, लेकिन वह हमेशा कहता था मैं ठीक हूं और अपनी ड्यूटी सही से अंजाम दे रहा हूं, इसमें डरने वाली कोई बात नहीं।
विज्ञापन
परिवार में अकेले कमाने वाले थे अल्ताफ
आतंकी हमले में शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के परिवार में उसकी मां, उसकी पत्नी, 18 माह का बेटा, दो छोटे भाई हैं। वहीं दो बहनों की शादी हो चुकी है। अल्ताफ ही परिवार में एक मात्र कमाने वाला था।
इस वर्ष आतंकी हमलों में 22 जवान हो चुके हैं शहीद
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष अब तक सुरक्षाबलों पर 91 हमले हो चुके हैं। इनमें से से 34 अर्द्ध्र सैनिक बलों, 25 जम्मू-कश्मीर पुलिस, 24 जनप्रतिनिधियों, सेना पर सात और एक बैंक गार्ड पर हुए हैं। इन हमलों में 19 नागरिक और जनप्रतिनिधि, 10 अर्द्ध सैनिक बलों के जवान, 9 पुलिस कर्मी और सेना के तीन जवान शहीद हो चुके हैं।
विज्ञापन
हालांकि, कश्मीर में कोरोना महामारी के चलते लोगों को एक जगह जमा होने पर पाबंदियां लगाई गई है, लेकिन इसके बावजूद लोग अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाते। ऐसी ही एक मिसाल जम्मू-कश्मीर पुलिस के शहीद कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के श्रीनगर के ईदगाह स्थित घर पर बुधवार को देखने को मिली, जब उनके जनाजे में शामिल होने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचे। कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन मंगलवार शाम गांदरबल जिले के नुनर इलाके में भाजपा नेता को बचाने में आतंकियों की गोली का शिकार हो गए थे।
विज्ञापन
जनाजे में शामिल एक व्यक्ति ने कहा कि अल्ताफ मेरा भाई था जिसने अपनी जान अपने फर्ज के लिए न्योछावर कर दी है। हमें उसकी शहादत पर गर्व है। उसने कहा कि अल्ताफ एक जिंदा दिल इंसान था और हमेशा से ही उसे पुलिस में जाने का शौक था। पिछले कुछ समय से भाजपा नेताओं को आतंकियों द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद परिवार वालों ने कई बार उसे भाजपा नेताओं के साथ न रहने की सलाह दी थी, लेकिन वह हमेशा कहता था मैं ठीक हूं और अपनी ड्यूटी सही से अंजाम दे रहा हूं, इसमें डरने वाली कोई बात नहीं।
विज्ञापन
परिवार में अकेले कमाने वाले थे अल्ताफ
आतंकी हमले में शहीद हुए कांस्टेबल अल्ताफ हुसैन के परिवार में उसकी मां, उसकी पत्नी, 18 माह का बेटा, दो छोटे भाई हैं। वहीं दो बहनों की शादी हो चुकी है। अल्ताफ ही परिवार में एक मात्र कमाने वाला था।
इस वर्ष आतंकी हमलों में 22 जवान हो चुके हैं शहीद
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष अब तक सुरक्षाबलों पर 91 हमले हो चुके हैं। इनमें से से 34 अर्द्ध्र सैनिक बलों, 25 जम्मू-कश्मीर पुलिस, 24 जनप्रतिनिधियों, सेना पर सात और एक बैंक गार्ड पर हुए हैं। इन हमलों में 19 नागरिक और जनप्रतिनिधि, 10 अर्द्ध सैनिक बलों के जवान, 9 पुलिस कर्मी और सेना के तीन जवान शहीद हो चुके हैं।