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नहीं रहे साहित्यकार डा. अख्तर अली
ब्यूरो/अमर उजाला पौड़ी
Updated Wed, 11 Feb 2015 11:24 PM IST
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राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार और पर्यावरणविद, डा. अख्तर अली का मंगलवार को ऋषिकेश में उपचार के दौरान इंतकाल हो गया।
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वे 70 वर्ष के थे। बुधवार को उनका पार्थिव शरीर नजीबाबाद स्थित कब्रिस्तान सुपुर्द-ए-खाक के लिए ले जाया गया। उनके निधन से क्षेत्र में साहित्यकारों, शिक्षाविदाें और पर्यावरण प्रेमियों में शोक की लहर है।
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डा. अख्तर अली को 16 जनवरी को दिल का दौरा पड़ा था।
इलाज के लिए वह ऋषिकेश गए थे। दस फरवरी को उन्होंने वहां के एक निजी अस्पताल में दम तोड़ दिया। दुगड्डा निवासी डा. अली हिंदी से पीएचडी थे और भौतिक विज्ञान एवं समाजशास्त्र से स्नातकोत्तर थे।
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भौतिक विज्ञान प्रवक्ता के रूप में कार्य करने के बाद वह पांच साल तक वह राजकीय इंटर कालेज दुगड्डा में प्रधानाचार्य भी रहे। कार्बेट वन्य जीव प्रशिक्षण केंद्र कालागढ़ में अतिथि प्रवक्ता के रूप में वह लगातार सेवाएं देते रहे। डा. अली ने वर्ष 1978 में दुगड्डा का आदमखोर पुस्तक हिंदी में लिखी।
इसका अंग्रेजी अनुवाद द मैन ईटर आफ दुगड्डा भी इसके अगले वर्ष ही प्रकाशित हुई। वर्ष 2002 में उन्होंने दुगड्डा का तेंदुआ पुस्तक लिखी।
ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर 2010 में एक पुस्तक भी प्रकाशित हुई। जिसके लिए उन्हें वर्ष 2012 में हिंदी दिवस पर राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान पुरस्कार से सम्मानित किया था। डा. अली ने इसके अलावा कई हास्य व्यंग साहित्य भी लिखे।
चंद्रशेखर आजाद के दुगड्डा आगमन के संकलन को भी उन्होंने प्रकाशित कराया। जीआईसी दुगड्डा, जीआईसी सिद्धपुर के प्रधानाचार्य शिक्षक, व्यापारियों और लोगों ने उनके निधन पर शोक जताया।