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एनआईटी: जयपुर में सेटेलाइट परिसर चलाने का नहीं रहेगा बहाना
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श्रीनगर इसी भूमि मे होना है एनआईटी के अस्थायी परिसर का निर्माण
- फोटो : SHRINAGAR
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एनआईटी उत्तराखंड की डीपीआर (विस्तृत परियोजना आख्या) को केंद्र सरकार की ओर से मंजूरी दिए जाने से श्रीनगर में अस्थायी परिसर के विस्तार का भी रास्ता साफ हो गया है। अब भक्तियाना में छात्रावास और लैब का निर्माण होगा, जिसके बाद एनआईटी प्रशासन के पास जयपुर में सेटेलाइट परिसर चलाने का बहाना नहीं रहेगा।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में एनआईटी उत्तराखंड स्वीकृत किया था। वर्ष 2010 से इसका अस्थायी परिसर श्रीनगर में पॉलीटेक्निक व आईटीआई की परिसंपत्तियों में संचालित हो रहा है। जगह की कमी की वजह से वर्ष 2018 से बीटेक तृतीय एवं चतुर्थ बैच की कक्षाएं एनआईटी जयुपर मेें बनाए गए सेटेलाइट परिसर में भी संचालित हो रही हैं। संस्थान का स्थायी परिसर सुमाड़ी में बनना है। जब तक सुमाड़ी में स्थायी परिसर का निर्माण होता है, तब तक भक्तियाना में ही इसके विस्तार का निर्णय लिया गया था। गत दिवस मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दोनों को मंजूरी दे दी। मानव संसाधन विकास मंत्री ने सत्र 2020-21 से सेटेलाइट परिसर को खत्म कर श्रीनगर में ही कक्षाएं संचालित करने की घोषणा की थी, लेकिन विगत जून माह में बीओजी ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए इस सत्र में भी जयपुर में कक्षाएं चलाने का निर्णय लिया। एनआईटी के निदेशक प्रो. एसएल सोनी ने बताया कि अस्थायी परिसर में स्थायी निर्माण किया जाएगा। छात्रावास और लैब निर्माण होने के बाद बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को श्रीनगर शिफ्ट कर दिया जाएगा। जबकि चतुर्थ वर्ष के छात्र अगले वर्ष पास आउट कर जाएंगे। इसके बाद एनआईटी पूर्ण रुप से श्रीनगर में ही चलेगा। ब्यूरो
एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण की डीपीआर पर जताई खुशी
श्रीनगर। एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी परिसर की डीपीआर स्वीकृत होने पर भाजपा के जिलाध्यक्ष संपत सिंह रावत व जिला मीडिया प्रभारी गणेश भट्ट गणपति ने प्रधानमंत्री, मानव संसाधन मंत्री, मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत का आभार व्यक्त किया है। कहा कि सुमाड़ी में एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण से जहां क्षेत्र का विकास होगा वहीं रोजगार के अवसर सृजित होंगे। संवाद
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में एनआईटी उत्तराखंड स्वीकृत किया था। वर्ष 2010 से इसका अस्थायी परिसर श्रीनगर में पॉलीटेक्निक व आईटीआई की परिसंपत्तियों में संचालित हो रहा है। जगह की कमी की वजह से वर्ष 2018 से बीटेक तृतीय एवं चतुर्थ बैच की कक्षाएं एनआईटी जयुपर मेें बनाए गए सेटेलाइट परिसर में भी संचालित हो रही हैं। संस्थान का स्थायी परिसर सुमाड़ी में बनना है। जब तक सुमाड़ी में स्थायी परिसर का निर्माण होता है, तब तक भक्तियाना में ही इसके विस्तार का निर्णय लिया गया था। गत दिवस मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने दोनों को मंजूरी दे दी। मानव संसाधन विकास मंत्री ने सत्र 2020-21 से सेटेलाइट परिसर को खत्म कर श्रीनगर में ही कक्षाएं संचालित करने की घोषणा की थी, लेकिन विगत जून माह में बीओजी ने संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए इस सत्र में भी जयपुर में कक्षाएं चलाने का निर्णय लिया। एनआईटी के निदेशक प्रो. एसएल सोनी ने बताया कि अस्थायी परिसर में स्थायी निर्माण किया जाएगा। छात्रावास और लैब निर्माण होने के बाद बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र-छात्राओं को श्रीनगर शिफ्ट कर दिया जाएगा। जबकि चतुर्थ वर्ष के छात्र अगले वर्ष पास आउट कर जाएंगे। इसके बाद एनआईटी पूर्ण रुप से श्रीनगर में ही चलेगा। ब्यूरो
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एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण की डीपीआर पर जताई खुशी
श्रीनगर। एनआईटी उत्तराखंड के स्थायी परिसर की डीपीआर स्वीकृत होने पर भाजपा के जिलाध्यक्ष संपत सिंह रावत व जिला मीडिया प्रभारी गणेश भट्ट गणपति ने प्रधानमंत्री, मानव संसाधन मंत्री, मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत का आभार व्यक्त किया है। कहा कि सुमाड़ी में एनआईटी के स्थायी परिसर निर्माण से जहां क्षेत्र का विकास होगा वहीं रोजगार के अवसर सृजित होंगे। संवाद
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