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जमीन गिरवी रखकर घरों को करेंगे रोशन
ब्यूरो/ अमर उजाला,पौड़ी।
Updated Sat, 04 Mar 2017 10:15 PM IST
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डीएस रावत।
- फोटो : amar ujala
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दिल्ली में कंस्ट्रक्शन का कारोबार छोड़कर डीएस रावत अब घरों को रोशन करेंगे। इस काम के लिए उन्होंने अपनी सारी जमीन जायदाद बैंक में गिरवी रख दी है। लक्ष्य सिर्फ एक है कि पहाड़ से जुड़कर काम करना और जरूरतमंदों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना। जल्द ही उनके सोलर प्लांट से 500 किलोवाट बिजली पैदा होने वाली है। बिजली पैदा करने के लिए सारा सिस्टम लग चुका है। इसके लिए उन्होंने 24 एकड़ बंजर जमीन व चट्टान को काटकर सोलर प्लांट लगाया है।
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पौड़ी से करीब 15 किलोमीटर दूर गांव खांड्यूसैंण के नजदीक कोट ब्लॉक के वड्डा गांव में गरीबी में पले बड़े डीएस रावत सिर्फ 10वीं तक ही पढ़ाई कर पाए। जब वह 11 साल के थे, उस समय उनके पिता की मौत हो गई थी। सिर पर कर्जे का बोझ भी था और छोटे भाई बहनों की परवरिश भी करनी थी। ऐसे में पढ़ाई करने के बाद वह दिल्ली चले गए। वह हाईकोर्ट में सरकारी नौकरी भी लग गए, लेकिन वेतन कम होने के कारण नौकरी छोड़ दी।
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दिल्ली में कंस्ट्रक्शन का काम शुरू किया तो इसमें काफी मुनाफा हुआ। खुद की कंस्ट्रक्शन कंपनी खोली और दिल्ली व नोएडा में 1000 के करीब कोठियां बनाईं। खुद भी प्लाट व मकान खरीदा।
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पहाड़ के प्रति प्रेम था, इसीलिए उन्होंने खुद दिल्ली में रहते हुए बच्चों को मसूरी से शिक्षा दिलाई। 2012 में वह गांव आ गए और ऐसा काम करने की योजना बनाई, जिससे पहाड़ में रहते हुए लोगों को भी फायदा हो। इसके बाद उन्होंने सोलर प्लांट प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया। प्रोजेक्ट पर 4 करोड़ से अधिक खर्चा आ रहा था, जोकि आम इंसान के लिए बहुत बड़ी रकम है, इसलिए उन्होंने दिल्ली में घर व प्लाट के साथ-साथ घर की जमीन व बच्चों की सारी पॉलिसी खत्म करके चार करोड़ 19 लाख रुपये से काम शुरू किया।
बचपन तो नहीं दे पाया, लेकिन बाकी उम्र यहीं काटूंगा
डीएस रावत कहते हैं कि घरेलू कारणों से बचपन तो गांव में नहीं कट पाया, लेकिन अब गांव व पहाड़ में ही रहने की इच्छा है। बेटे ने बीटैक की है, जोकि इस प्लांट के कामकाज को देखेंगे। कहा कि प्लांट लगाने का लक्ष्य पैसा कमाना नहीं है, बल्कि जरूरतमंदों को रोजगार व अच्छी शिक्षा दिलाना है।
प्लांट शुरू होने के बाद यहां पर करीब 15 लोगों को रोजगार मिलेगा। जल्द ही वह प्लांट के निकट ही एक स्कूल खोलेंगे, जिसमें उन बच्चों को अच्छे स्तर की शिक्षा दिलाई जाएगी, जोकि पैसे के कारण पढ़ाई नहीं कर पाते।