{"_id":"684330a05d00ae081f0d3b5f","slug":"modern-technology-lab-will-be-constructed-in-district-hospital-pauri-shrinagar-news-c-5-1-gkp1010-709910-2025-06-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pauri News: फेफड़ों की ब्रोंकोस्कोपी जांच से मिल रहे कैंसर के केस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pauri News: फेफड़ों की ब्रोंकोस्कोपी जांच से मिल रहे कैंसर के केस
विज्ञापन
श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल के श्वास रोग (रेस्पिरेटरी मेडिसिन) विभाग में हो रही फेफड़ों की ब्रोंकोस्कोपी जांच में फेफड़ों के गंभीर संक्रमण एवं कैंसर के केस पकड़ में आ रहे हैं। बेस अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने के बाद से अब तक 100 से अधिक मरीजों की जांच हो चुकी है। पूर्व में यह सुविधा न होने से मरीजों को शहर से बाहर देहरादून या ऋषिकेश के अस्पतालों में जांच के लिए जाना पड़ता था।
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. विक्की बक्शी ने बताया कि 110 मरीजों की ब्रोंकोस्कोपी जांच अभी तक हो चुकी है। जिसमें से 21 मरीजों के फेफड़ों में कैंसर की पुष्टि हुई है। जिसमें से कुछ मरीजों का उपचार कैंसर विभाग के अधीन इलाज चल रहा है। कुछ गंभीर मरीज एम्स ऋषिकेश भेजे गये हैं। कहा कि 18 मरीजों में फेफड़ों में जांच के बाद संक्रमण मिला। इन मरीजों का इलाज रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अधीन चल रहा है। जिसमें से अधिकांश मरीज ठीक हो चुके है।
डॉ. बक्शी ने बताया कि ब्रोंकोस्कोपी ऐसी जांच है, जिसमें ब्रोंकोस्कोप को नाक या मुंह के माध्यम से डाला जाता है और इसे गले और श्वास नली से होते हुए फेफड़ों में ले जाया जाता है। फेफडों में जाकर किसी संक्रमण का पता लगाया जा सकता है व इससे संबंधित सैंपल लिए जा सकते हैं। ब्रोंकोस्कोपी फेफड़े के कैंसर, निमोनिया, टीबी एवं अन्य श्वास रोगों की पुष्टि करने के लिए उपयोग होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. विक्की बक्शी ने बताया कि 110 मरीजों की ब्रोंकोस्कोपी जांच अभी तक हो चुकी है। जिसमें से 21 मरीजों के फेफड़ों में कैंसर की पुष्टि हुई है। जिसमें से कुछ मरीजों का उपचार कैंसर विभाग के अधीन इलाज चल रहा है। कुछ गंभीर मरीज एम्स ऋषिकेश भेजे गये हैं। कहा कि 18 मरीजों में फेफड़ों में जांच के बाद संक्रमण मिला। इन मरीजों का इलाज रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अधीन चल रहा है। जिसमें से अधिकांश मरीज ठीक हो चुके है।
विज्ञापन
डॉ. बक्शी ने बताया कि ब्रोंकोस्कोपी ऐसी जांच है, जिसमें ब्रोंकोस्कोप को नाक या मुंह के माध्यम से डाला जाता है और इसे गले और श्वास नली से होते हुए फेफड़ों में ले जाया जाता है। फेफडों में जाकर किसी संक्रमण का पता लगाया जा सकता है व इससे संबंधित सैंपल लिए जा सकते हैं। ब्रोंकोस्कोपी फेफड़े के कैंसर, निमोनिया, टीबी एवं अन्य श्वास रोगों की पुष्टि करने के लिए उपयोग होता है।
विज्ञापन