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सूअर के मांस खाने से कई ग्रामीण बीमार
kotdwar
Updated Sat, 24 Jan 2015 10:37 PM IST
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रिखणीखाल ब्लाक के सिरस्वाड़ी गांव में कई लोग अज्ञात बीमारी की चपेट में हैं।
चर्चा है कि सूअर का मांस खाने के बाद ही ग्रामीण बीमारी की चपेट में आए हैं। ग्रामीणों का दून अस्पताल में उपचार चल रहा है।
जानकारी के अनुसार एक हफ्ते पहले सिरस्वाड़ी गांव के पास एक मरा हुआ सूअर मिला था।
एक ग्रामीण इसे घर ले आया और गांव के अन्य लोगों को भी सुअर का मांस बांट दिया।
मांस खाने के एक-दो दिन बाद कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। चेहरों पर सूजन आने लगी। शुरू में तो किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो इलाज कराने लगे।
गांव के मोहन लाल और उसके दो बेटे, राजू और उसकी पत्नी को उपचार के लिए दून अस्पताल में भर्ती किया है।
गांव की ही एक अन्य महिला नंदा देवी का कोटद्वार के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। बताया जा रहा है कि सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उन्हें दून ले जाने की सलाह दी है।
गांव में अन्य लोग भी इस बीमारी की चपेट में हैं। प्रधान यशोदा देवी ने बताया कि गांव के लोग बीमार तो हुए हैं, लेकिन सूअर का मांस खाने की जानकारी नहीं है।
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लोग इलाज के लिए दून और अन्य जगह जा रहे हैं।
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चर्चा है कि सूअर का मांस खाने के बाद ही ग्रामीण बीमारी की चपेट में आए हैं। ग्रामीणों का दून अस्पताल में उपचार चल रहा है।
जानकारी के अनुसार एक हफ्ते पहले सिरस्वाड़ी गांव के पास एक मरा हुआ सूअर मिला था।
एक ग्रामीण इसे घर ले आया और गांव के अन्य लोगों को भी सुअर का मांस बांट दिया।
मांस खाने के एक-दो दिन बाद कुछ लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी। चेहरों पर सूजन आने लगी। शुरू में तो किसी ने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो इलाज कराने लगे।
गांव के मोहन लाल और उसके दो बेटे, राजू और उसकी पत्नी को उपचार के लिए दून अस्पताल में भर्ती किया है।
गांव की ही एक अन्य महिला नंदा देवी का कोटद्वार के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। बताया जा रहा है कि सुधार नहीं होने पर चिकित्सकों ने उन्हें दून ले जाने की सलाह दी है।
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गांव में अन्य लोग भी इस बीमारी की चपेट में हैं। प्रधान यशोदा देवी ने बताया कि गांव के लोग बीमार तो हुए हैं, लेकिन सूअर का मांस खाने की जानकारी नहीं है।
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लोग इलाज के लिए दून और अन्य जगह जा रहे हैं।