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पशु चिकित्सालय में लगा ताला
बैजरो
Updated Fri, 20 Nov 2015 05:56 PM IST
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पशु चिकित्सालय प्रशासन बीरोखाल की लापरवाही क्षेत्र के ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। दो दिनों से राजकीय पशु चिकित्सालय में ताला लटका हुआ है, लोगों के पालतू जानवरों की जान भगवान भरोसे है।
ब्लाक मुख्यालय बीरोखाल के राजकीय पशु चिकित्सालय मे दो दिन से ताले लटके होने के कारण पशुपालकों को उनके जानवरों की चिकित्सा से वंचित होना पड़ रहा है। लोग दूर दराज के गांव से अपने बीमार जानवरों को अस्पताल ला रहे हैं, लेकिन अस्पताल में ताला लटका देखकर उन्हें बिना इलाज कराए मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। जंगली जानवरों के मारने से लागों के मवेशियों के पोस्टमॉर्टम नहीं हो पा रहे हैं जिससे उन्हें मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।
बीरोंखाल में तैनात पशु चिकित्साअधिकारी देहरादून में बैठ रहे हैं। जबकि बीरोखाल का प्रभार नैनीडांडा के पशुधन अधिकारी के पास है। जिसके चलते यहां के ग्रामीण को भारी परेशानी का सामना करना पड रहा है। बलाक प्रमुख कविता पोखरियाल का कहना है कि प्रभारी पशुधन अधिकारी ने सप्ताह मे तीन दिन बीरोखाल में बैठने का आश्वासन दिया था पर वह पूरा नहीं हुआ। जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्राम पंचायत कथडो निवासी राजे सिंह ने बताया कि उनकी आठ बकरियों को बाघ ने मार दिया। उनके मुआवजे के लिए पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम भी कराना पड़ता है, किंतु बीरोखाल पशु चिकित्सालय में ताला लटका होने के कारण उसे मुआवजा नहीं मिल पाएगा। उधर, जिला पशु चिकित्साअधिकारी अभय गर्ग ने ताला बंदी पर नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
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ब्लाक मुख्यालय बीरोखाल के राजकीय पशु चिकित्सालय मे दो दिन से ताले लटके होने के कारण पशुपालकों को उनके जानवरों की चिकित्सा से वंचित होना पड़ रहा है। लोग दूर दराज के गांव से अपने बीमार जानवरों को अस्पताल ला रहे हैं, लेकिन अस्पताल में ताला लटका देखकर उन्हें बिना इलाज कराए मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। जंगली जानवरों के मारने से लागों के मवेशियों के पोस्टमॉर्टम नहीं हो पा रहे हैं जिससे उन्हें मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।
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बीरोंखाल में तैनात पशु चिकित्साअधिकारी देहरादून में बैठ रहे हैं। जबकि बीरोखाल का प्रभार नैनीडांडा के पशुधन अधिकारी के पास है। जिसके चलते यहां के ग्रामीण को भारी परेशानी का सामना करना पड रहा है। बलाक प्रमुख कविता पोखरियाल का कहना है कि प्रभारी पशुधन अधिकारी ने सप्ताह मे तीन दिन बीरोखाल में बैठने का आश्वासन दिया था पर वह पूरा नहीं हुआ। जनता को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्राम पंचायत कथडो निवासी राजे सिंह ने बताया कि उनकी आठ बकरियों को बाघ ने मार दिया। उनके मुआवजे के लिए पशु चिकित्सक से पोस्टमार्टम भी कराना पड़ता है, किंतु बीरोखाल पशु चिकित्सालय में ताला लटका होने के कारण उसे मुआवजा नहीं मिल पाएगा। उधर, जिला पशु चिकित्साअधिकारी अभय गर्ग ने ताला बंदी पर नाराजगी जताते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
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