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श्रीनगर-पौड़ी पेयजल योजना से जल निगम ने हाथ खींचे
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जल संस्थान की ओर से श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना की मरम्मत किए जाने के बाद पेयजल निगम ने योजना संचालन और रखरखाव से हाथ खड़े कर दिए हैं। निगम का तर्क है कि जल संस्थान ने अपने स्तर से बिना सूचना दिए पाइप लाइन की मरम्मत करवाई है। इससे स्पष्ट होता है कि संस्थान ने योजना हस्तांतरित कर ली है। वहीं, संस्थान का कहना है कि पूर्व में लिए गए निर्णयों के अनुसार ही पाइप लाइन की मरम्मत की गई है।
श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के डीएसबी (डी-सिल्ट बेसिन) से आ रही श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना के हस्तांतरण का विवाद थम नहीं रहा है। योजना का निर्माण पेयजल निगम देवप्रयाग डिवीजन ने किया है। इस पर 25 फरवरी 2020 से पानी चल रहा है। पानी का वितरण जल संस्थान कर रहा है। रखरखाव मेें आ रही दिक्कतों को देखते हुए निगम ने जल संस्थान की योजना हस्तांतरण के लिए पत्र लिखा। निगम के अधिशासी अभियंता आरएस बिष्ट का कहना है कि श्रीकोट में पाइप लाइन में लीकेज हो रही थी। इसकी मरम्मत के लिए संस्थान से धनराशि देने या हस्तांतरण के बाद अपने स्तर से मरम्मत करने का अनुरोध किया गया था लेकिन संस्थान ने उन्हें बिना सूचना दिए लाइन की मरम्मत कर दी। इसके लिए सीमेंट का एंकर ब्लॉक भी तोड़ा गया जिसका दोबारा निर्माण नहीं किया गया। संस्थान को विभागीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए हस्तांतरण के बाद मरम्मत नहीं करनी चाहिए थी।
वहीं, जल संस्थान के सहायक अभियंता कृष्णकांत का कहना है कि 16 नवंबर को पौड़ी मेें इस संबंध में बैठक हुई थी। बैठक में प्रशासन ने हस्तांतरण होने तक दोनों विभागों को संचालन के निर्देेश दिए थे। इसी के तहत मरम्मत करवाई गई है। उन्होंने बताया कि हस्तांतरण संबंधी दस्तावेज तैयार हो रहे हैं।
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श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के डीएसबी (डी-सिल्ट बेसिन) से आ रही श्रीनगर-पौड़ी वैकल्पिक स्रोत पेयजल योजना के हस्तांतरण का विवाद थम नहीं रहा है। योजना का निर्माण पेयजल निगम देवप्रयाग डिवीजन ने किया है। इस पर 25 फरवरी 2020 से पानी चल रहा है। पानी का वितरण जल संस्थान कर रहा है। रखरखाव मेें आ रही दिक्कतों को देखते हुए निगम ने जल संस्थान की योजना हस्तांतरण के लिए पत्र लिखा। निगम के अधिशासी अभियंता आरएस बिष्ट का कहना है कि श्रीकोट में पाइप लाइन में लीकेज हो रही थी। इसकी मरम्मत के लिए संस्थान से धनराशि देने या हस्तांतरण के बाद अपने स्तर से मरम्मत करने का अनुरोध किया गया था लेकिन संस्थान ने उन्हें बिना सूचना दिए लाइन की मरम्मत कर दी। इसके लिए सीमेंट का एंकर ब्लॉक भी तोड़ा गया जिसका दोबारा निर्माण नहीं किया गया। संस्थान को विभागीय प्रोटोकॉल का पालन करते हुए हस्तांतरण के बाद मरम्मत नहीं करनी चाहिए थी।
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वहीं, जल संस्थान के सहायक अभियंता कृष्णकांत का कहना है कि 16 नवंबर को पौड़ी मेें इस संबंध में बैठक हुई थी। बैठक में प्रशासन ने हस्तांतरण होने तक दोनों विभागों को संचालन के निर्देेश दिए थे। इसी के तहत मरम्मत करवाई गई है। उन्होंने बताया कि हस्तांतरण संबंधी दस्तावेज तैयार हो रहे हैं।
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