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यूएई में अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में व्याख्यान देंगे डा. राजन
कोटद्वार
Updated Mon, 16 Nov 2015 09:23 PM IST
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में तैनात डा. राजन कुमार गुप्ता को नेपाल और श्रीलंका में 20 से 22 नवंबर तक आयोजित होने वाली अंतराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने व व्याख्यान प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है। महाविद्यालय के प्राचार्य एमएस रौतेला और सभी प्रोफेसरों ने डा. राजन की उपलब्धियों पर खुशी जताई है।
डा. राजन राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार में एसोसिएट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान एवं युवा शूक्ष्म जीवी वैज्ञानिक पद पर तैनात हैं। इससे पूर्व वे राजकीय स्नातकोत्तर स्वायत्तशासी महाविद्यालय ऋषिकेश में तैनात थे। दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डा. राजन अंटार्टिका पर किए गए अपने शोध पर व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। विगत कुछ वर्षों में डा. राजन अमेरिका, जापान, नेपाल, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मारीशस, यूरोप, सिंगापुर, श्रीलंका और अंटार्टिका की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने उत्तराखंड काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी देहरादून द्वारा दो मेजर परियोजनाओं पर कार्य किया है। उनकी बारह पुस्तकें एवं सौ शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके निर्देशन में नौ छात्र और छात्राओं ने डी.फिल. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समितियों की सदस्यता प्राप्त की है। डा. राजन दो बार वैज्ञानिक दल के सदस्य के रूप में अंटार्टिका की यात्रा कर चुके हैं। इस दौरान वह शैवालों और अंटार्टिका के वातावरण पर विस्तृत शोध कर चुके हैं।
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डा. राजन राजकीय महाविद्यालय कोटद्वार में एसोसिएट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान एवं युवा शूक्ष्म जीवी वैज्ञानिक पद पर तैनात हैं। इससे पूर्व वे राजकीय स्नातकोत्तर स्वायत्तशासी महाविद्यालय ऋषिकेश में तैनात थे। दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में डा. राजन अंटार्टिका पर किए गए अपने शोध पर व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। विगत कुछ वर्षों में डा. राजन अमेरिका, जापान, नेपाल, थाईलैंड, दक्षिण अफ्रीका, मारीशस, यूरोप, सिंगापुर, श्रीलंका और अंटार्टिका की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने उत्तराखंड काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलॉजी देहरादून द्वारा दो मेजर परियोजनाओं पर कार्य किया है। उनकी बारह पुस्तकें एवं सौ शोध पत्र अंतरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। उनके निर्देशन में नौ छात्र और छात्राओं ने डी.फिल. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समितियों की सदस्यता प्राप्त की है। डा. राजन दो बार वैज्ञानिक दल के सदस्य के रूप में अंटार्टिका की यात्रा कर चुके हैं। इस दौरान वह शैवालों और अंटार्टिका के वातावरण पर विस्तृत शोध कर चुके हैं।
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