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जागरूकता के अभाव में दूर रहते हैं एचआईवी पीड़ित
कोटद्वार
Updated Mon, 30 Nov 2015 07:02 PM IST
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पहाड़ी क्षेत्रों में एचआईवी जैसी भयानक बीमारियों के बारे में लोगों में जागरूकता नहीं है। इसीलिए पौड़ी गढ़वाल जैसे पहाड़ी इलाके में इस बीमारी ने पांव पसार लिए हैं। राजकीय संयुक्त अस्पताल के लिंक एआरटी सेंटर में अब तक दर्ज आंकड़े यही बयां कर रहे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो पुरुषों की अपेक्षा संक्रमित महिलाओं की संख्या अधिक है।
सेंटर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कोटद्वार और दुगड्डा के आसपास के पहाड़ी इलाकों में भी एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में इजाफा हुआ है। 2008 में शुरू हुए इस सेंटर में साल दर साल संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। तब से अब तक सौ लोग संक्रमित पाए गए हैं। वर्तमान में सेंटर से 32 लोगों का इलाज और काउंसिलिंग चल रही है। वर्ष 2015 में अप्रैल माह से नवंबर तक आठ महीने में उन्नीस महिलाओं और तेरह पुरुषों सहित कुल 32 मामले एचआईवी के आए हैं। लेकिन जागरूकता के अभाव के चलते कई लोग एचआईवी जांच से दूर ही रहते हैं। ऐसा करके वे अपनी और अपने परिवार की जिंदगी दांव पर लगाते हैं। उन्हें सरकारी केंद्रों पर आकर निशुल्क उपचार और दवाइयों का लाभ उठाना चाहिए।
अस्पताल में काउंसलरों का कहना है कि आंकड़ों के बढ़ने के पीछे लोगों में जागरूकता की कमी है। पहले लोग जांच करने में हिचक महसूस करते थे, लेकिन अब लोगों में जागरूकता आने से लोग जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इससे एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का पता चल जाता है। एचआईवी संक्रमित लोगों में समलैंगिग, इंटरा ड्रग यूजर्स और माइग्रेट्स सबसे बड़ी चुनौती बने हैं। इनमें एचआईवी फैलने का सबसे अधिक खतरा रहता है। ऐसे मामलों में जरा भी संदेह होने पर अस्पताल के एआरटी लिंक सेंटर से संपर्क करना चाहिए।
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कोट
लोगों में एड्स के प्रति जागरूकता की कमी के कारण रोगियों की संख्या बढ़ी है। कोई भी व्यक्ति आईसीटीसी सेंटर में आकर इस बारे में जानकारी ले सकता है। प्रत्येक व्यक्ति का डाटा यहां पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है।
- संगीता कुकरेती, काउंसलर आईसीटीसी एवं लिंक एआरटी सेंटर कोटद्वार
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सेंटर में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कोटद्वार और दुगड्डा के आसपास के पहाड़ी इलाकों में भी एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की संख्या में इजाफा हुआ है। 2008 में शुरू हुए इस सेंटर में साल दर साल संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। तब से अब तक सौ लोग संक्रमित पाए गए हैं। वर्तमान में सेंटर से 32 लोगों का इलाज और काउंसिलिंग चल रही है। वर्ष 2015 में अप्रैल माह से नवंबर तक आठ महीने में उन्नीस महिलाओं और तेरह पुरुषों सहित कुल 32 मामले एचआईवी के आए हैं। लेकिन जागरूकता के अभाव के चलते कई लोग एचआईवी जांच से दूर ही रहते हैं। ऐसा करके वे अपनी और अपने परिवार की जिंदगी दांव पर लगाते हैं। उन्हें सरकारी केंद्रों पर आकर निशुल्क उपचार और दवाइयों का लाभ उठाना चाहिए।
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अस्पताल में काउंसलरों का कहना है कि आंकड़ों के बढ़ने के पीछे लोगों में जागरूकता की कमी है। पहले लोग जांच करने में हिचक महसूस करते थे, लेकिन अब लोगों में जागरूकता आने से लोग जांच कराने के लिए पहुंच रहे हैं। इससे एचआईवी संक्रमित व्यक्ति का पता चल जाता है। एचआईवी संक्रमित लोगों में समलैंगिग, इंटरा ड्रग यूजर्स और माइग्रेट्स सबसे बड़ी चुनौती बने हैं। इनमें एचआईवी फैलने का सबसे अधिक खतरा रहता है। ऐसे मामलों में जरा भी संदेह होने पर अस्पताल के एआरटी लिंक सेंटर से संपर्क करना चाहिए।
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लोगों में एड्स के प्रति जागरूकता की कमी के कारण रोगियों की संख्या बढ़ी है। कोई भी व्यक्ति आईसीटीसी सेंटर में आकर इस बारे में जानकारी ले सकता है। प्रत्येक व्यक्ति का डाटा यहां पूरी तरह से गोपनीय रखा जाता है।
- संगीता कुकरेती, काउंसलर आईसीटीसी एवं लिंक एआरटी सेंटर कोटद्वार