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हिमालय के ग्लेशियर उत्तराखंड की लाइफ लाइन
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गढ़वाल विवि के ग्रामीण प्रौद्योगिकी (रुरल टेक्नोलॉजी) विभाग और गोविंद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण संस्थान की संयुक्त पहल पर हिमालय क्षेत्र में स्थायी जलागम प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण और योजना विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
चौरास स्थित गढ़वाल विवि के एक्टिविटी सेंटर में मंगलवार को आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि विवि के कुलसचिव डॉ. एके खंडूड़ी, मुख्य वक्ता आईआईटी रुड़की के प्रो. एसके मिश्रा व प्रो. एके सर्राफ, गढ़वाल विवि के वानिकी विभागाध्यक्ष प्रो. एके नेगी, भू विज्ञान के प्रो. एचसी नैनवाल, कार्यशाला के संयोजक रूरल टेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र सिंह नेगी और हिमालय पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एस तरफदार ने किया।
मुख्य अतिथि डॉ. खंडूड़ी ने जल, मिट्टी एवं वन का महत्व बताते हुए युवा पीढ़ी को इसके संरक्षण के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता प्रो. मिश्रा और प्रो. सराफ ने जलागम प्रबंधन के तरीके बताए। ग्लेशियोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. नैनवाल ने बताया कि हमारी धरती 4.6 बिलियन साल पुरानी है, जिसमें समय-समय पर परिवर्तन होता ही रहता है। संचालन डॉ. एसएस रावत, डॉ. एलएस रावत, एमएससी के छात्र मयंक रावत व दीक्षिता शर्मा ने किया।
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चौरास स्थित गढ़वाल विवि के एक्टिविटी सेंटर में मंगलवार को आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि विवि के कुलसचिव डॉ. एके खंडूड़ी, मुख्य वक्ता आईआईटी रुड़की के प्रो. एसके मिश्रा व प्रो. एके सर्राफ, गढ़वाल विवि के वानिकी विभागाध्यक्ष प्रो. एके नेगी, भू विज्ञान के प्रो. एचसी नैनवाल, कार्यशाला के संयोजक रूरल टेक्नोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. राजेंद्र सिंह नेगी और हिमालय पर्यावरण संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एस तरफदार ने किया।
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मुख्य अतिथि डॉ. खंडूड़ी ने जल, मिट्टी एवं वन का महत्व बताते हुए युवा पीढ़ी को इसके संरक्षण के लिए प्रेरित किया। मुख्य वक्ता प्रो. मिश्रा और प्रो. सराफ ने जलागम प्रबंधन के तरीके बताए। ग्लेशियोलॉजी विशेषज्ञ प्रो. नैनवाल ने बताया कि हमारी धरती 4.6 बिलियन साल पुरानी है, जिसमें समय-समय पर परिवर्तन होता ही रहता है। संचालन डॉ. एसएस रावत, डॉ. एलएस रावत, एमएससी के छात्र मयंक रावत व दीक्षिता शर्मा ने किया।
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