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गढ़वाली को बढ़ावा देने पर दिया जोर
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गढ़वाली भाषा साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयासरत आखर चैरिटेबल ट्रस्ट ने अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर कार्यक्रम हुआ, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि हमारी मातृभाषा ही हमारी पहचान है। मातृभाषा के पक्ष में विचार रखते हुए रचनाकारों ने गढ़वाली बोली को बढ़ावा देने, नई पीढ़ी को अपनी मातृभाषा से जोड़ने व भाषा के संरक्षण पर जोर दिया।
सोमवार को न्यू डांग स्थित ट्रस्ट कार्यालय में कवयित्री अंशी कमल ने गढ़वाली सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. अशोक बडोनी ने कहा कि गढ़वाली बोली के जो शब्द प्रचलन से बाहर हो रहे हैं, उनको संरक्षित करने की आवश्यकता है। ट्रस्ट उपाध्यक्ष प्रो. डा. नागेंद्र रावत ने कहा कि अपनी मातृभाषा के प्रति हमें अपने दायित्वों को समझना होगा। ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष रेखा चमोली ने कहा कि हमें मातृभाषा बचाने की पहल अपने घर से करनी होगी। संचालन ट्रस्ट के अध्यक्ष संदीप रावत ने किया। कार्यक्रम में कंचन पंवार, संजय रावत, मयंक पंवार, संगीता पंवार व मुख्य ट्रस्टी लक्ष्मी रावत आदि मौजूद थे।
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सोमवार को न्यू डांग स्थित ट्रस्ट कार्यालय में कवयित्री अंशी कमल ने गढ़वाली सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। साहित्यकार एवं शिक्षाविद डॉ. अशोक बडोनी ने कहा कि गढ़वाली बोली के जो शब्द प्रचलन से बाहर हो रहे हैं, उनको संरक्षित करने की आवश्यकता है। ट्रस्ट उपाध्यक्ष प्रो. डा. नागेंद्र रावत ने कहा कि अपनी मातृभाषा के प्रति हमें अपने दायित्वों को समझना होगा। ट्रस्ट की कोषाध्यक्ष रेखा चमोली ने कहा कि हमें मातृभाषा बचाने की पहल अपने घर से करनी होगी। संचालन ट्रस्ट के अध्यक्ष संदीप रावत ने किया। कार्यक्रम में कंचन पंवार, संजय रावत, मयंक पंवार, संगीता पंवार व मुख्य ट्रस्टी लक्ष्मी रावत आदि मौजूद थे।
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