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धार्मिक स्थलों की दिव्यता के साथ न हो छेड़छाड़ : शंकराचार्य

Thu, 16 Nov 2023 05:14 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 16 Nov 2023 05:14 PM IST
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Divinity of religious places should not be tampered with: Shankaracharya
फोटो
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श्रीनगर बीकेटीसी की धर्मशाला में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि धार्मिक स्थलों को भव्यता देने के लिए उनकी दिव्यता के साथ छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। कहा कि भव्यता सभी मिलकर बना सकते हैं लेकिन दिव्यता के लिए तपस्या करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यहां श्रद्धालु दिव्यता देखने आते हैं। यह बात उन्होंने बदरीनाथ में चल रहे मास्टर प्लान के निर्माण कार्यों को लेकर कही।
श्रीनगर बदरी-केदार मंदिर समिति की धर्मशाला में पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने केदारनाथ मंदिर के गर्भ ग्रह में सोने की परत चढ़ाए जाने को लेकर चल रहे विवादित प्रकरण पर कहा कि भगवान से धोखाधड़ी होना यह पहली बार सुना जा रहा है। सोना लगे हुए एक वर्ष से अधिक समय बीत गया। मामले में जांच कमेटी केवल जांच की बात तक ही अटकी है। इसका खुलासा करने में मंदिर समिति अभी तक अक्षम रही है। किसी न किसी स्तर से इस मामले में धोखा हुआ जिसने भी धोखा दिया है उसका चेहरा सामने आना जरूरी है।
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उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा कि गर्भ गृह में फोटो खिंचवाना अनुचित है। प्राण प्रतिष्ठित जितने भी विग्रह हैं उनका चित्र नहीं लेना चाहिए। चित्र खींचने से कोई पुण्य नहीं मिलता है। मंदिर का चित्र लिया सकता है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में रहने वाले सनातन धर्मियों में धारणा बन गई है कि उत्तराखंड के चार धामों में छह महीने ही दर्शन और पूजा करने का पुण्य मिलता है। इस धारणा को बदलने के लिए हम स्वयं शीतकाल में यात्रा प्रारंभ करेंगे। कहा कि उत्तराखंड चारधाम के शीतकालीन पूजा स्थलों पर दर्शन पूजन करेंगे।
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उन्होंने कहा कि सरकारों को धार्मिक कार्यों में हस्तक्षेप करने के बजाय धर्माचायों को सहयोग करना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि राजनीति के विशेषज्ञों को धर्म का पंडित नहीं बनना चाहिए। उत्तरकाशी सिलक्यारा सुरंग हादसे को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि बार-बार ऐसे हादसे हो रहे हैं और किसी भी घटना से हम कुछ नहीं सीख रहे हैं। इस मौके पर कमलेश्वर महादेव मंदिर के महंत आशुतोष पुरी, भोपाल सिंह चौधरी आदि मौजूद रहे।
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