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‘जलवायु परिवर्तन से विलुप्त हो रहे पुराने शैवाल’
कोटद्वार
Updated Thu, 26 Nov 2015 09:40 PM IST
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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कोटद्वार में तैनात डॉ. राजन कुमार गुप्ता, एसोसिएट प्रोफेसर, वनस्पति विज्ञान को यूएई, दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अंटार्कटिका में किए गए अपने शोध पर व्याख्यान देने के लिए सम्मनित किया गया है।
डॉ. राजन को 20 से 22 नवंबर तक दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था। जहां उन्होंने दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन और इसके परिणामों पर व्याख्यान दिया। कहा कि अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन के चलते एक अलग तरह का परिवर्तन हो रहा है, वहां की जलवायु आगे की ओर शिफ्ट हो रही है, जिसका असर वहां के सूक्ष्मजीवी शैवालों पर पड़ा है। पुरानी प्रजाति विलुप्त हो चुकी और नई प्रजाति आ रही हैं।
युुएई, दुबई से लौटने पर डॉ. गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन में दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका पर किये गये अपने शोध के विषय में व्याख्यान दिया। इसमें अंटार्कटिका में शैवाल कहां और कितनी मात्रा में पाए गए, उनकी उपस्थिति से अंटार्कटिका के वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। कौन-कौन सी जातियां विगत वर्षों में परिवर्तित हुई हैं। परिवर्तन के क्या कारण रहे हैं और क्या भविष्य में कभी पेड़-पौधे अंटार्कटिका की धरती पर पैदा हो सकेंगे। व्याख्यान इन बातों पर केंद्रीत रहा। सम्मेलन के प्रतिभागियों ने उनके व्याख्यान की सराहना की। आयोजकों ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। बताया कि वह दुबई के इस सम्मेलन में प्रस्तुत किये जाने वाले शोध पत्रों हेतु निर्णायक समिति के सदस्य भी थे।
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बताया कि उत्तराखंड काउंसिल फार साइंस एवं टेक्नोलाजी, (यूकास्ट), देहरादून द्वारा उन्हें सम्मेलन में जाने के लिए सहायता की गई थी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमएस रौतेला व महाविद्यालय के अन्य प्रोफेसरों ने डॉ. गुप्ता की उपलब्धियों को महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों से डॉ. गुप्ता से प्रेरणा प्राप्त कर शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उच्च मापदंड स्थापित करने का आह्वान किया।
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डॉ. राजन को 20 से 22 नवंबर तक दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया था। जहां उन्होंने दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन और इसके परिणामों पर व्याख्यान दिया। कहा कि अंटार्कटिका में जलवायु परिवर्तन के चलते एक अलग तरह का परिवर्तन हो रहा है, वहां की जलवायु आगे की ओर शिफ्ट हो रही है, जिसका असर वहां के सूक्ष्मजीवी शैवालों पर पड़ा है। पुरानी प्रजाति विलुप्त हो चुकी और नई प्रजाति आ रही हैं।
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युुएई, दुबई से लौटने पर डॉ. गुप्ता ने बताया कि सम्मेलन में दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिका पर किये गये अपने शोध के विषय में व्याख्यान दिया। इसमें अंटार्कटिका में शैवाल कहां और कितनी मात्रा में पाए गए, उनकी उपस्थिति से अंटार्कटिका के वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। कौन-कौन सी जातियां विगत वर्षों में परिवर्तित हुई हैं। परिवर्तन के क्या कारण रहे हैं और क्या भविष्य में कभी पेड़-पौधे अंटार्कटिका की धरती पर पैदा हो सकेंगे। व्याख्यान इन बातों पर केंद्रीत रहा। सम्मेलन के प्रतिभागियों ने उनके व्याख्यान की सराहना की। आयोजकों ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। बताया कि वह दुबई के इस सम्मेलन में प्रस्तुत किये जाने वाले शोध पत्रों हेतु निर्णायक समिति के सदस्य भी थे।
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बताया कि उत्तराखंड काउंसिल फार साइंस एवं टेक्नोलाजी, (यूकास्ट), देहरादून द्वारा उन्हें सम्मेलन में जाने के लिए सहायता की गई थी। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमएस रौतेला व महाविद्यालय के अन्य प्रोफेसरों ने डॉ. गुप्ता की उपलब्धियों को महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने सभी छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों से डॉ. गुप्ता से प्रेरणा प्राप्त कर शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में उच्च मापदंड स्थापित करने का आह्वान किया।