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मृत सूअर में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि होने पर चलाया जागरूकता अभियान
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शहर की वाल्मीकि बस्ती में मृत सूअर में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पुष्टि होने पर विभाग ने जागरूकता अभियान शुरू कर दिया है। पिछले 15 दिनों में 35 से अधिक सुअरों की मौत होने पर विभाग की टीम अब वाल्मीकि बस्ती के लोगों को स्वच्छता और बचाव के उपाय बता रही है। बताया कि जहां सूअर बीमार हैं और संक्रमण फैल रहा है ऐसे स्थानों पर फॉगिंग और नालियों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव किया जाए।
क्षेत्र के बीआरएम विद्यालय के प्रधानाचार्य डीपी ममगाईं ने बीते 24 जून को स्कूल के समीप मृत सुअरों को दफनाने व गदेरे में डाले जाने से गंभीर संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका जताते हुए इसकी शिकायत डीएम से की थी। डीएम डा. विजय कुमार जोगदंडे ने नगर पालिका और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम गठित कर वाल्मीकि बस्ती में भेजा था। पशुपालन विभाग ने मृत सुअरों के सैंपल लेकर बरेली भेजा था। जांच रिपोर्ट में सुअरों की मृत्यु का कारण अफ्रीकन स्वाइन फीवर पाया गया है। इस पर पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डा. अशोक कुमार व मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रमेश ने वाल्मीकि बस्ती में सूअर पालकों से मुलाकात की। इस टीम में शामिल सुपरवाइजर राजू रेडियान ने बताया कि यह संक्रमण वाली बीमारी है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी प्रदीप बिष्ट, एसआई हेमंत कुमार ने सूअर पालकों को साफ सफाई रखने के लिए निर्देशित किया है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी रमेश नितिवाल ने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर का अभी तक कोई उपचार नहीं है। इससे बचाव के लिए जानवरों को खुले में न छोड़ें। गोबर व मृत जानवरों को गड्ढे में दफनाएं। इसके अलावा उन्हें छिड़काव के लिए ब्लीचिंग या डीडीटी आदि दिया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा भी दी गई है। यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है।
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क्षेत्र के बीआरएम विद्यालय के प्रधानाचार्य डीपी ममगाईं ने बीते 24 जून को स्कूल के समीप मृत सुअरों को दफनाने व गदेरे में डाले जाने से गंभीर संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका जताते हुए इसकी शिकायत डीएम से की थी। डीएम डा. विजय कुमार जोगदंडे ने नगर पालिका और पशुपालन विभाग की संयुक्त टीम गठित कर वाल्मीकि बस्ती में भेजा था। पशुपालन विभाग ने मृत सुअरों के सैंपल लेकर बरेली भेजा था। जांच रिपोर्ट में सुअरों की मृत्यु का कारण अफ्रीकन स्वाइन फीवर पाया गया है। इस पर पशुपालन विभाग के अपर निदेशक डा. अशोक कुमार व मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. रमेश ने वाल्मीकि बस्ती में सूअर पालकों से मुलाकात की। इस टीम में शामिल सुपरवाइजर राजू रेडियान ने बताया कि यह संक्रमण वाली बीमारी है। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी प्रदीप बिष्ट, एसआई हेमंत कुमार ने सूअर पालकों को साफ सफाई रखने के लिए निर्देशित किया है।
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मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी रमेश नितिवाल ने कहा कि अफ्रीकन स्वाइन फीवर का अभी तक कोई उपचार नहीं है। इससे बचाव के लिए जानवरों को खुले में न छोड़ें। गोबर व मृत जानवरों को गड्ढे में दफनाएं। इसके अलावा उन्हें छिड़काव के लिए ब्लीचिंग या डीडीटी आदि दिया जा रहा है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दवा भी दी गई है। यह बीमारी जानवरों से इंसानों में नहीं फैलती है।
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