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कौन कहता है पशुओं में नहीं होती मां की ममता
लैंसडौन
Updated Thu, 05 Nov 2015 09:31 PM IST
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कौन कहता है कि पशुओं में मां की ममता नहीं होती। ऐसे ही एक मामला बृहस्पतिवार को जब छावनी नगर लैंसडौन में देखने को मिला तो देखने वालों की आंखें नम हो गई। इस नजारे को देखने के लिए लोगों का हुजूम जमा हो गया। इसके बाद कई हाथ कुत्ते के बच्चों को बचाने के लिए आगे बढ़ गए।
हुआं यूं कि पांच दिन पहले एक कुतिया ने गांधी चौक स्थित एक नाली में आठ बच्चों को जन्म दिया। जहां पर बच्चों का जन्म हुआ, वहां कुछ ज्यादा ही ठंड थी। जन्म के अगले दिन ठंड से बेहाल बच्चों को सुरक्षित करने के लिए कुतिया अपने बच्चों को धूप वाली जगह पर एक-एक कर ले गई। धूप की तपिश तेज होती गई तो बच्चे फिर से बिलखने लगे। मां बच्चों को दोबारा पहले वाली जगह पर वापस ले गई। कुतिया की मदद के लिए कई हाथ आगे आए तो पांच दिन पूर्व जन्में उसके बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी ने गत्ते तो किसी ने टाट बोरी बिछाकर बच्चों को ठंड से बचाया। कुतिया और उसके बच्चे नाले में ही सो गए।
बृहस्पतिवार सुबह पांच बजे रिमझिम बारिश हुई और नाले में पानी बढ़ने लगा तो कुतिया के बच्चे ठंड से बेहाल हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर कुतिया उन्हें एक- एक कर अपने मुहं में दबाकर एक दुकान के बरामदें में ले जाती रही। उसे हर बच्चे की बराबर चिंता सता रही थी। सुरक्षित स्थान पर ले जाकर वह ठंड से कांप रहे बच्चों को अपने बदन से चिपकाकर गर्मी भी देती रही। नाले से करीब 20 मीटर के फासले पर उसे बच्चों को ले जाने और दूध पिलाकर सुलाने में करीब दो घंटे लग गए। मां की ममता के इस नजारे को देखने के लिए इस जगह लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय निवासी आशु अरोड़ा उनके लिए दूध, बन बिस्कुट लेकर आई। तो कुछ लोगों ने मां का साथ बंटाते हुए उनके लिए बोरी का प्रबंध कर बच्चों को उस पर लिटा दिया। मां की संवेदना का यह मामला नगर में चर्चा का विषय बना रहा। लोगों ने बच्चों को लोगों ने एक नया आशियाना दिया है। जहां मां और उसके बच्चे एकदम सुरक्षित हैं। बच्चों की सुरक्षा और मदद के चलते कुतिया लोगों की ओर इस नजर से देख रही थी, मानों वह कृतज्ञता प्रकट कर रही हो।
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हुआं यूं कि पांच दिन पहले एक कुतिया ने गांधी चौक स्थित एक नाली में आठ बच्चों को जन्म दिया। जहां पर बच्चों का जन्म हुआ, वहां कुछ ज्यादा ही ठंड थी। जन्म के अगले दिन ठंड से बेहाल बच्चों को सुरक्षित करने के लिए कुतिया अपने बच्चों को धूप वाली जगह पर एक-एक कर ले गई। धूप की तपिश तेज होती गई तो बच्चे फिर से बिलखने लगे। मां बच्चों को दोबारा पहले वाली जगह पर वापस ले गई। कुतिया की मदद के लिए कई हाथ आगे आए तो पांच दिन पूर्व जन्में उसके बच्चों की सुरक्षा के लिए किसी ने गत्ते तो किसी ने टाट बोरी बिछाकर बच्चों को ठंड से बचाया। कुतिया और उसके बच्चे नाले में ही सो गए।
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बृहस्पतिवार सुबह पांच बजे रिमझिम बारिश हुई और नाले में पानी बढ़ने लगा तो कुतिया के बच्चे ठंड से बेहाल हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर कुतिया उन्हें एक- एक कर अपने मुहं में दबाकर एक दुकान के बरामदें में ले जाती रही। उसे हर बच्चे की बराबर चिंता सता रही थी। सुरक्षित स्थान पर ले जाकर वह ठंड से कांप रहे बच्चों को अपने बदन से चिपकाकर गर्मी भी देती रही। नाले से करीब 20 मीटर के फासले पर उसे बच्चों को ले जाने और दूध पिलाकर सुलाने में करीब दो घंटे लग गए। मां की ममता के इस नजारे को देखने के लिए इस जगह लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय निवासी आशु अरोड़ा उनके लिए दूध, बन बिस्कुट लेकर आई। तो कुछ लोगों ने मां का साथ बंटाते हुए उनके लिए बोरी का प्रबंध कर बच्चों को उस पर लिटा दिया। मां की संवेदना का यह मामला नगर में चर्चा का विषय बना रहा। लोगों ने बच्चों को लोगों ने एक नया आशियाना दिया है। जहां मां और उसके बच्चे एकदम सुरक्षित हैं। बच्चों की सुरक्षा और मदद के चलते कुतिया लोगों की ओर इस नजर से देख रही थी, मानों वह कृतज्ञता प्रकट कर रही हो।
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