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प्रतियोगिताओं में अमित और प्रवीण ने मारी बाजी
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केंद्रीय संस्कृत विवि श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़े के समापन पर हिंदी के महत्व और प्रचार-प्रसार पर जोर दिया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं की घोषणा कर उन्हें सम्मानित किया गया।
श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़े के अंतिम दिन विभिन्न राज्यों के कवियों ने ऑनलाइन प्रतिभाग कर रचनाएं प्रस्तुत कीं। मुख्य अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. सुधारानी पांडेय ने हिंदी के महत्व और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के आधुनिक विभागाध्यक्ष प्रो. शिशिर पांडेय ने कहा कि आज हिंदी के विकास के लिए संस्कृत के मॉडल की आवश्यकता है। डॉ. सुभाषचंद्र ने कहा कि हिंदी ने स्वयं ही लोकप्रियता और विकास हासिल नहीं किया बल्कि उसने अपने साथ संस्कृत का भी विकास किया है। परिसर के साहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. विजयपाल शास्त्री ने संस्कृत, हिंदी और अन्य बोलियों की शब्द संपदा पर प्रकाश डाला। डॉ. वीरेंद्र सिंह बत्र्वाल ने विजेता प्रतिभागियों की घोषणा की।श्रुतिलेख में छात्र प्रवीण चमोली प्रथम, श्रुति शर्मा द्वितीय और साध्वी देवाश्रिता तृतीय रहीं। परिसरीय शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की हिंदी भाषा सामान्य ज्ञान स्पर्धा में अमित कुमार पहले अंकित थलासी दूसरे और मनीष कंडारी तीसरे स्थान पर रहे। कार्यक्रम के अंत में परिसर निदेशक प्रो. बनमाली बिश्वाल ने हिंदी के शब्द भंडार का विस्तृत विवेचन कर प्रतिभागियों का आभार जताया। इस मौके पर डॉ. दिनेशचंद्र पांडेय, डॉ. अरविंद सिंह गौर, डॉ. सच्चिदानंद स्नेही, डॉ. कृपाशंकर शर्मा, डॉ. जनार्दन सुवेदी, डॉ. अनिल कुमार आदि मौजूद थे।
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श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर में हिंदी पखवाड़े के अंतिम दिन विभिन्न राज्यों के कवियों ने ऑनलाइन प्रतिभाग कर रचनाएं प्रस्तुत कीं। मुख्य अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. सुधारानी पांडेय ने हिंदी के महत्व और संभावनाओं पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के आधुनिक विभागाध्यक्ष प्रो. शिशिर पांडेय ने कहा कि आज हिंदी के विकास के लिए संस्कृत के मॉडल की आवश्यकता है। डॉ. सुभाषचंद्र ने कहा कि हिंदी ने स्वयं ही लोकप्रियता और विकास हासिल नहीं किया बल्कि उसने अपने साथ संस्कृत का भी विकास किया है। परिसर के साहित्य विभागाध्यक्ष प्रो. विजयपाल शास्त्री ने संस्कृत, हिंदी और अन्य बोलियों की शब्द संपदा पर प्रकाश डाला। डॉ. वीरेंद्र सिंह बत्र्वाल ने विजेता प्रतिभागियों की घोषणा की।श्रुतिलेख में छात्र प्रवीण चमोली प्रथम, श्रुति शर्मा द्वितीय और साध्वी देवाश्रिता तृतीय रहीं। परिसरीय शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की हिंदी भाषा सामान्य ज्ञान स्पर्धा में अमित कुमार पहले अंकित थलासी दूसरे और मनीष कंडारी तीसरे स्थान पर रहे। कार्यक्रम के अंत में परिसर निदेशक प्रो. बनमाली बिश्वाल ने हिंदी के शब्द भंडार का विस्तृत विवेचन कर प्रतिभागियों का आभार जताया। इस मौके पर डॉ. दिनेशचंद्र पांडेय, डॉ. अरविंद सिंह गौर, डॉ. सच्चिदानंद स्नेही, डॉ. कृपाशंकर शर्मा, डॉ. जनार्दन सुवेदी, डॉ. अनिल कुमार आदि मौजूद थे।
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