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डाक्टर नपें, तो मानेंगे हुई ठोस कार्रवाई
Pauri
Updated Tue, 26 Mar 2013 05:31 AM IST
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कोटद्वार। गुलदार के हमले और स्वास्थ्य महकमे की लापरवाही का शिकार हुई मासूम प्रिया के मामले में चपरासी पर कार्रवाई को लोग पर्याप्त नहीं मानते। उनका कहना है कि डाक्टर और अन्य जिम्मेदार स्टाफ नपें, तो माना जाएगा कि ठोस कार्रवाई की गई। अन्यथा, यह दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं होगा।
बुध गांव की छह वषीय मासूम प्रिया को जख्मी हालत में उसके परिजन दुगड्डा पीएचसी में उपचार के लिए लाए थे। उसे गुलदार ने जख्मी कर दिया था, लेकिन पीएचसी का गेट नहीं खुला। वहां पर ताला लगा हुआ था। 108 एंबुलेंस ने कई बार सायरन बजाया, मगर किसी ने यह नहीं सोचा कि आराम में जरा सा खलल किसी मासूम की जिंदगी बचा सकता है। बाद में कोटद्वार लाते वक्त मासूम प्रिया की मौत हो गई थी। इस मामले में बमुश्किल से स्वास्थ्य महकमा कार्रवाई के लिए राजी हुआ, लेकिन सिर्फ चपरासी को सस्पेंड किया गया। लोग डाक्टर और जिम्मेदार स्टाफ के निलंबन की मांग पर जोर दे रहे हैं।
क्या कहते हैं लोग
अस्पताल में नहीं लगा सकते ताला
-अस्पताल में 24 घंटे की सुविधा दी जाती है। ऐसे में अस्पताल में ताले नहीं लगाए जा सकते हैं, लेकिन दुगड्डा पीएचसी में ताले लगे हुए थे, जिसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की है। जिम्मेदार डाक्टरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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-अजय कुमार पंत, अध्यक्ष बार संघ
डाक्टर होने चाहिए निलंबित
-चौकीदार को निलंबित करने से क्या होगा। इसके लिए वहां तैनात डाक्टरों को निलंबित किया जाना चाहिए। गेट पर ताला लगाने के लिए वो ही जिम्मेदार हैं।-आलोक रावत, सांसद प्रतिनिधि
गरीब को बनाया बलि का बकरा
-अस्पताल में तैनात डाक्टरों के बजाय छोटे और गरीब कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया गया है। यह बिलकुल गलत है। अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।-रमेश चंद्र खंतवाल, घांदलीखाल लैंसडौन
जल्द हो डाक्टरों का निलंबन
-चौकीदार के बजाय डाक्टरों का निलंबन होना चाहिए। छोटे कर्मचारी को निशाना बनाया गया है। यह एकदम गलत निर्णय है।-विजय सिंह रावत, जडियाना लैंसडौन
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बुध गांव की छह वषीय मासूम प्रिया को जख्मी हालत में उसके परिजन दुगड्डा पीएचसी में उपचार के लिए लाए थे। उसे गुलदार ने जख्मी कर दिया था, लेकिन पीएचसी का गेट नहीं खुला। वहां पर ताला लगा हुआ था। 108 एंबुलेंस ने कई बार सायरन बजाया, मगर किसी ने यह नहीं सोचा कि आराम में जरा सा खलल किसी मासूम की जिंदगी बचा सकता है। बाद में कोटद्वार लाते वक्त मासूम प्रिया की मौत हो गई थी। इस मामले में बमुश्किल से स्वास्थ्य महकमा कार्रवाई के लिए राजी हुआ, लेकिन सिर्फ चपरासी को सस्पेंड किया गया। लोग डाक्टर और जिम्मेदार स्टाफ के निलंबन की मांग पर जोर दे रहे हैं।
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क्या कहते हैं लोग
अस्पताल में नहीं लगा सकते ताला
-अस्पताल में 24 घंटे की सुविधा दी जाती है। ऐसे में अस्पताल में ताले नहीं लगाए जा सकते हैं, लेकिन दुगड्डा पीएचसी में ताले लगे हुए थे, जिसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन की है। जिम्मेदार डाक्टरों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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-अजय कुमार पंत, अध्यक्ष बार संघ
डाक्टर होने चाहिए निलंबित
-चौकीदार को निलंबित करने से क्या होगा। इसके लिए वहां तैनात डाक्टरों को निलंबित किया जाना चाहिए। गेट पर ताला लगाने के लिए वो ही जिम्मेदार हैं।-आलोक रावत, सांसद प्रतिनिधि
गरीब को बनाया बलि का बकरा
-अस्पताल में तैनात डाक्टरों के बजाय छोटे और गरीब कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया गया है। यह बिलकुल गलत है। अन्य लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।-रमेश चंद्र खंतवाल, घांदलीखाल लैंसडौन
जल्द हो डाक्टरों का निलंबन
-चौकीदार के बजाय डाक्टरों का निलंबन होना चाहिए। छोटे कर्मचारी को निशाना बनाया गया है। यह एकदम गलत निर्णय है।-विजय सिंह रावत, जडियाना लैंसडौन