न्यूरो सर्जन मौजूद, पर नहीं है एनेस्थेसिस्ट

Pauri Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
श्रीनगर। पौड़ी, चमोली, रूद्रप्रयाग और टिहरी जिले की लगभग 16 लाख की आबादी को स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने वाले मेडिकल कालेज न्यूरो सर्जन तो हैं, लेकिन डॉक्टर को सर्जरी में मदद करने के लिए एनेस्थेसिस्ट ही नहीं है। इससे रोगियों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
बेस अस्पताल की ओटी में प्रवेश से पूर्व लगा नोटिस ध्यान खींचता है। इसमें लिखा है कि किसी भी रोगी को आपरेशन में दिक्कत हो रही हो, तो निम्न मोबाइल नंबरों पर संपर्क करें। इसी नोटिस में आगे नोट लिखा गया है कि न्यूरो सर्जरी के लिए एनेस्थेसिस्ट नहीं हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी हिस्सों में चट्टानों से गिरकर मौत हो जाने से कई मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में दो वर्ष पूर्व बेस अस्पताल के न्यूरो सर्जरी विभाग में नियुक्त हुए सुपर स्पेशलिस्ट न्यूरो सर्जन के लिए अस्पताल में एनेस्थेसिस्ट का न होना अजब स्थिति को बयां करता है।
एनेस्थीसिया विभाग की अध्यक्ष न्यूरो सर्जरी के लिए एनेस्थेसिस्ट के पास डीएम डिग्री होना जरूरी मानती हैं, जबकि न्यूरोलॉजिस्ट डा.महेश रमोला कहते हैं कि देश भर के 99 प्रतिशत अस्पतालों में एमडी एनेस्थेसिस्ट ही न्यूरोलॉजी संबंधी आपरेशन करवाते हैं। प्राचार्य डा.वीएल जहागिरदार कहते हैं कि दोनों विभागों के डॉक्टर अपनी-अपनी जगह ठीक कह रहे हैं। ऐसे में शासन स्तर पर बीच का कोई रास्ता निकाला जाना चाहिए।

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‘मजबूरी में कई जरूरतमंदों को रेफर करता हूं। रोगी के परिजनों की सहमति पर लोकल में जो आपरेशन किए जा सकते हैं, उन्हें मैं करता हूं, लेकिन एनेस्थीसिया विभाग का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इसकी शिकायत स्वयं प्राचार्य से भी की जा चुकी है।’
डा.महेश रमोला, न्यूरो सर्जरी के सुपर स्पेशलिस्ट, बेस हास्पिटल

‘न्यूरो सर्जरी कराने के लिए एनेस्थेसिस्ट को डीएम (डॉक्टरेट इन मेडिसन) होना आवश्यक है, लेकिन यहां कार्यरत सभी एनेस्थेसिस्ट एमडी हैं। सभी एनेस्थेसिस्ट मुझे पत्र दे चुके हैं कि डीएम न होने कारण न्यूरो सर्जरी के केस नहीं किए जा सकते हैं।’
डा.आईएस योग, अध्यक्ष, एनेस्थीसिया विभाग



बद से बदतर जिला अस्पताल की ‘सेहत’
सर्जन न होने से ऑपरेशन थिएटर है ठप
अमर उजाला ब्यूरो
पौड़ी। जिला चिकित्सालय की सेहत दिन ब दिन बद से बदतर होती जा रही है। वर्तमान में यहां सर्जन नहीं है। इस वजह से ऑपरेशन थियेटर ठप पड़ा है। जिला अस्पताल यूं तो पहले से ही डाक्टरों की कमी के चलते खानापूर्ति बना हुआ था, लेकिन चार माह पहले हुए डाक्टरों के तबादले से हालात और खराब हो गए हैं। मौजूदा हाल पर नजर डालें तो जिला अस्पताल में फिजिशियन से लेकर ईएनटी, चर्म रोग, नेत्र, पैथोलॉजिस्ट, रेडियालॉजिस्ट के पदों पर तैनाती न होने से स्वास्थ्य सेवाएं चौपट हो गई हैं।
अस्पताल में उपचार को पहुंचे कोतवाल सिंह, मनोहर, पिंकी, हिमांशु सिंह आदि ने बताया कि अब इस अस्पताल पर एक बुखार की गोली का भी भरोसा नहीं रहा। शिकायत पर नेताओं की ओर से डाक्टरों की जल्द तैनाती का भरोसा दिया जाता है लेकिन समाधान के प्रयास दूर तक नहीं दिखते हैं।


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‘सर्जन का पद रिक्त होने से ओटी तक सेवाएं ठप होने से दिक्कतें स्वाभाविक हैं। फिजीसियन समेत कई पद रिक्त पड़े हुए हैं। तैनाती के लिए शासन को लिखा गया है। संविदा की व्यवस्थाएं भी समुचित नहीं हो पा रही हैं।’डा सावित्री उनियाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक जिला अस्पताल पौड़ी

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