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सड़क निर्माण से पर्यावरणीय नुकसान के साथ-साथ पर्यटन विकास
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श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि के राजनीति विज्ञान विभाग में उत्तराखंड में चार धाम परियोजना के विकास व पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई। वक्ताओं ने कहा कि सूक्ष्म विनाश के साथ विकास कार्य किए जाएं। इस मौके पर शिक्षकों, शोधार्थियों व छात्र-छात्राओं ने परियोजना के लाभ व नुकसान पर विचार रखे।
बिड़ला परिसर में आयोजित परिचर्चा में भूगोल विभाग के प्रो. देवीदत्त ने कहा कि परियोजना से पर्यावरणीय एवं कृषि भूमि को नुकसान तो है, लेकिन इससे यातायात सुगम होगा। पर्यावरणीय नुकसान कम करने के लिए सड़क बनने के साथ ही पौधरोपण का काम भी किया जाना चाहिए।
राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. एससी सूद ने कहा कि यह परियोजना सामारिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इसको पर्यावरण के नुकसान से इतर देखना होगा। विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि यह परियोजना पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सूक्ष्म विनाश के साथ विकास कार्य होना चाहिए। प्रो. आरएन गैरोला ने कहा कि परियोजना पलायन रोकने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
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संचालन करते हुए शोध छात्रा शिवानी पांडेय ने परियोजना विकास का कार्यक्रम है, लेकिन इससे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
शोध छात्रा ममता उप्रेती ने कहा कि आपदा के प्रति संवेदनशील उत्तराखंड में सड़क निर्माण से पर्यावरण, पारिस्थितिकी व कृषि भूमि पर बुरा असर पड़ेगा। छात्र गौरव डिमरी, पूजा नेगी व निकिता ने भी विचार रखे।
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बिड़ला परिसर में आयोजित परिचर्चा में भूगोल विभाग के प्रो. देवीदत्त ने कहा कि परियोजना से पर्यावरणीय एवं कृषि भूमि को नुकसान तो है, लेकिन इससे यातायात सुगम होगा। पर्यावरणीय नुकसान कम करने के लिए सड़क बनने के साथ ही पौधरोपण का काम भी किया जाना चाहिए।
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राजनीति विज्ञान विभाग के प्रो. एससी सूद ने कहा कि यह परियोजना सामारिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इसको पर्यावरण के नुकसान से इतर देखना होगा। विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सेमवाल ने कहा कि यह परियोजना पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सूक्ष्म विनाश के साथ विकास कार्य होना चाहिए। प्रो. आरएन गैरोला ने कहा कि परियोजना पलायन रोकने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
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संचालन करते हुए शोध छात्रा शिवानी पांडेय ने परियोजना विकास का कार्यक्रम है, लेकिन इससे पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
शोध छात्रा ममता उप्रेती ने कहा कि आपदा के प्रति संवेदनशील उत्तराखंड में सड़क निर्माण से पर्यावरण, पारिस्थितिकी व कृषि भूमि पर बुरा असर पड़ेगा। छात्र गौरव डिमरी, पूजा नेगी व निकिता ने भी विचार रखे।