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आंदोलनकारियों की जांच में जुटा प्रशासन, 149 को नोटिस
Updated Sat, 13 Jan 2018 10:33 PM IST
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पौड़ी। प्रशासन ने चिह्नित आंदोलनकारियों के प्रमाण पत्रों की जांच नए सिरे शुरू की है। पहले चरण में 149 चिह्नित राज्य आंदोलनकारियों को एडीएम रामजी शरण शर्मा ने नोटिस जारी किए हैं। आंदोलनकारियों को इस महीने की अंतिम तारीख तक एडीएम के समक्ष आयु संबंधी पुष्ट प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे।
पांच जुलाई 2017 को आंदोलनकारी चिह्नीकरण समिति ने 149 आवेदन प्रस्तुत किए। समिति ने इन सभी को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा दे दिया। इसके बाद पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति व अन्य संगठनों ने इस मामले में जिलाधिकारी से शिकायत की। हो-हल्ले के बाद जिलाधिकारी सुशील कुमार ने एडीएम रामजी शरण शर्मा को मामले की जांच सौंपी। एडीएम ने जांच के नोटिस जारी किए हैं। नोटिस के मुताबिक आंदोलनकारियों को अपने आयु संबंधी पुष्ट प्रमाण एडीएम के समक्ष इस माह की अंतिम तारीख तक प्रस्तुत करने होंगे। प्रथम दृष्टया एडीएम की जांच में यह भी सामने आया है कि 90 फीसदी आवेदन पत्रों में आयु प्रमाण पत्र ही जमा नहीं किए गए हैं। बहरहाल एडीएम सतही जांच में जुटे हुए हैं और इस जांच के बाद 30 जनवरी को प्रस्तुत किए गए 824 आवेदन पत्रों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
कोट
पुष्ट आयु प्रमाण पत्रों की जांच से तय हो जाएगा कि वर्ष 1994 में आवेदक की आयु कितनी थी और वह आंदोलन में शामिल थे या नहीं। राज्य आंदोलनकारियों का प्रशासन पूरा सम्मान करता है, लेकिन फर्जी प्रमाणों के आधार पर किसी को आंदोलनकारी नहीं बनाया सकता।
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-रामजी शरण शर्मा, एडीएम
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पांच जुलाई 2017 को आंदोलनकारी चिह्नीकरण समिति ने 149 आवेदन प्रस्तुत किए। समिति ने इन सभी को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा दे दिया। इसके बाद पौड़ी बचाओ संघर्ष समिति व अन्य संगठनों ने इस मामले में जिलाधिकारी से शिकायत की। हो-हल्ले के बाद जिलाधिकारी सुशील कुमार ने एडीएम रामजी शरण शर्मा को मामले की जांच सौंपी। एडीएम ने जांच के नोटिस जारी किए हैं। नोटिस के मुताबिक आंदोलनकारियों को अपने आयु संबंधी पुष्ट प्रमाण एडीएम के समक्ष इस माह की अंतिम तारीख तक प्रस्तुत करने होंगे। प्रथम दृष्टया एडीएम की जांच में यह भी सामने आया है कि 90 फीसदी आवेदन पत्रों में आयु प्रमाण पत्र ही जमा नहीं किए गए हैं। बहरहाल एडीएम सतही जांच में जुटे हुए हैं और इस जांच के बाद 30 जनवरी को प्रस्तुत किए गए 824 आवेदन पत्रों पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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पुष्ट आयु प्रमाण पत्रों की जांच से तय हो जाएगा कि वर्ष 1994 में आवेदक की आयु कितनी थी और वह आंदोलन में शामिल थे या नहीं। राज्य आंदोलनकारियों का प्रशासन पूरा सम्मान करता है, लेकिन फर्जी प्रमाणों के आधार पर किसी को आंदोलनकारी नहीं बनाया सकता।
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-रामजी शरण शर्मा, एडीएम