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466-compat
Updated Wed, 18 Jul 2018 10:44 PM IST
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पौड़ी। प्रदेश के 4668 अतिथि शिक्षक कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन रहते हुए बहाल किए जा सकते हैं। दून में मुख्यमंत्री से मिले इन अतिथि शिक्षकों को शिक्षा विभाग की ओर से इसका आश्वासन मिला है। राजकीय इंटर कालेेजों में कार्यरत इन अतिथि शिक्षकों की इसी वर्ष 31 मार्च को सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।
प्रदेश में शिक्षकों की कमी को देखते हुए राजकीय इंटरमीडिएट कालेजों में अतिथि शिक्षकों के रूप में सहायक अध्यापक और प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गई थी। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ओर से इनके लिए अल्पकालिक शिक्षक सेवा नियमावली बनाई गई थी। नियमावली के अनुसार इन अतिथि शिक्षकों की तीन साल की सेवा को देखते हुए इन्हें नियमित नियुक्ति की जानी थी, लेकिन कुछ बेरोजगारों के इस नियमावली को कोर्ट में चुनौती देने से मामला कोर्ट में विचाराधीन है। वहीं 31 मार्च 2018 को इन चार हजार से अधिक शिक्षकों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं, लेकिन अब सरकार इन शिक्षकों के मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रही है। इसमें कहा गया है कि छात्र हित को देखते हुए कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन इन्हें तैनाती दी जाए। दून से पौड़ी लौटे गेस्ट टीचर संगठन के जिलाध्यक्ष हरीश थपलियाल ने कहा कि अतिथि शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिला। इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से कोर्ट का फैसला आने तक उनके लिए यह रास्ता निकाला गया है।
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प्रदेश में शिक्षकों की कमी को देखते हुए राजकीय इंटरमीडिएट कालेजों में अतिथि शिक्षकों के रूप में सहायक अध्यापक और प्रवक्ताओं की नियुक्ति की गई थी। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की ओर से इनके लिए अल्पकालिक शिक्षक सेवा नियमावली बनाई गई थी। नियमावली के अनुसार इन अतिथि शिक्षकों की तीन साल की सेवा को देखते हुए इन्हें नियमित नियुक्ति की जानी थी, लेकिन कुछ बेरोजगारों के इस नियमावली को कोर्ट में चुनौती देने से मामला कोर्ट में विचाराधीन है। वहीं 31 मार्च 2018 को इन चार हजार से अधिक शिक्षकों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गईं, लेकिन अब सरकार इन शिक्षकों के मामले में कोर्ट में याचिका दाखिल करने जा रही है। इसमें कहा गया है कि छात्र हित को देखते हुए कोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन इन्हें तैनाती दी जाए। दून से पौड़ी लौटे गेस्ट टीचर संगठन के जिलाध्यक्ष हरीश थपलियाल ने कहा कि अतिथि शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिला। इसमें शिक्षा विभाग के अधिकारियों की ओर से कोर्ट का फैसला आने तक उनके लिए यह रास्ता निकाला गया है।
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