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गढ़वाल विवि में स्थापित एलएलएन सेंसर ने काम करना किया शुरू
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श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि में स्थापित लाइटनिंग लोकेशन नेटवर्क (एलएलएन) सेंसर ने काम करना शुरू कर दिया है। सेंसर में दो-तीन दिन पूर्व बिजली चमकने और गिरने की घटनाओं का सटीक विश्लेषण किया है। सेंसर ने श्रीनगर से 20 से 40 किलोमीटर हवाई दूरी (पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी) क्षेत्र में बिजली चमकने की घटनाएं दर्ज की हैं। सेंसर के काम करने से वैज्ञानिकों और आम जनता को मौसम में हो रहे अचानक बदलाव की सटीक जानकारी मिलेगी। जिससे समय रहते समुदाय को अलर्ट किया जा सकता है।
भारतीय उष्णदेशाीय मौसम संस्थान (आईआईटीएम) पुणे के सहयोग से एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर के भौतिकी विभाग में बिजली चमकने/गिरने और आंधी-तूफान का अध्ययन करने के लिए प्रयोगशाला स्थापित की गई है। प्रयोगशाला में एलएलएन सेंसर लगाया गया है। जो उक्त गतिविधि को कैद करने के साथ ही पूर्वानुमान लगा लेता है। भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. आलोक सागर गौतम की देखरेख में एक टीम प्रयोगशाला संचालित कर रही है।
पिछले दो- तीन बार क्षेत्र में बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली चमकने की घटनाएं हुई हैं। सेंसर इन घटनाओं का दर्ज किया है। डा. गौतम ने बताया कि वातावरण में विद्युतीय तरंग हर समय प्रवाहित होती रहती हैं। मौसम में किसी भी प्रकार का बदलाव होने पर विद्युतीय तरंगों में भी परिवर्तन होता है। यदि इन तरंगों की तीव्रता का अध्ययन किया जाए, तो मौसम का पूर्वानुमान किया जा सकता है। सेंसर इसी काम को कर रहा है।
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उन्होंने बताया कि एलएलए सेंसर कई सेंसरों का सामूहिक रुप है। इसमें ऐसे सेंसर होते हैं, जो वातावरणीय विद्युत को रिकार्ड करते हैं। वोल्ट और एंपियर में गणना होने पर मौसम परिवर्तन के अध्ययन में आसानी होती है।
अक्तूबर में स्थापित में होगा सेंसर
श्रीनगर। डा. गौतम ने आईआईटीएम के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुनील डी पवार से गढ़वाल विवि में सेंसर स्थापित करवाने का अनुरोध किया था। जिसको मंजूरी देते हुए डा. पंवार ने विवि के भौतिकी विभाग को सेंसर दिए हैं। उक्त सेंसर डा. पंवार ने ही बनाए हैं। गत वर्ष अक्तूबर माह में यह सेंसर गढ़वाल विवि के चौरास परिसर में स्थापित किए गए।
दामिनी एप से ले सकते हैं जानकारी
श्रीनगर। बारिश के दौरान होने वाले परिवर्तनों की जानकारी मोबाइल फोन यूजर्स दामिनी: बिजली चेतावनी एप से ले सकते हैं। इस एप से क्षेत्र में बिजली गिरने की संभावनाओं का अलर्ट जारी होता है। यह ऐप यह भी बताता है कि क्षेत्र में कहां बिजली चमकी या गिरी।
भारतीय उष्णदेशाीय मौसम संस्थान (आईआईटीएम) पुणे के सहयोग से एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि श्रीनगर के भौतिकी विभाग में बिजली चमकने/गिरने और आंधी-तूफान का अध्ययन करने के लिए प्रयोगशाला स्थापित की गई है। प्रयोगशाला में एलएलएन सेंसर लगाया गया है। जो उक्त गतिविधि को कैद करने के साथ ही पूर्वानुमान लगा लेता है। भौतिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डा. आलोक सागर गौतम की देखरेख में एक टीम प्रयोगशाला संचालित कर रही है।
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पिछले दो- तीन बार क्षेत्र में बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली चमकने की घटनाएं हुई हैं। सेंसर इन घटनाओं का दर्ज किया है। डा. गौतम ने बताया कि वातावरण में विद्युतीय तरंग हर समय प्रवाहित होती रहती हैं। मौसम में किसी भी प्रकार का बदलाव होने पर विद्युतीय तरंगों में भी परिवर्तन होता है। यदि इन तरंगों की तीव्रता का अध्ययन किया जाए, तो मौसम का पूर्वानुमान किया जा सकता है। सेंसर इसी काम को कर रहा है।
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उन्होंने बताया कि एलएलए सेंसर कई सेंसरों का सामूहिक रुप है। इसमें ऐसे सेंसर होते हैं, जो वातावरणीय विद्युत को रिकार्ड करते हैं। वोल्ट और एंपियर में गणना होने पर मौसम परिवर्तन के अध्ययन में आसानी होती है।
अक्तूबर में स्थापित में होगा सेंसर
श्रीनगर। डा. गौतम ने आईआईटीएम के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. सुनील डी पवार से गढ़वाल विवि में सेंसर स्थापित करवाने का अनुरोध किया था। जिसको मंजूरी देते हुए डा. पंवार ने विवि के भौतिकी विभाग को सेंसर दिए हैं। उक्त सेंसर डा. पंवार ने ही बनाए हैं। गत वर्ष अक्तूबर माह में यह सेंसर गढ़वाल विवि के चौरास परिसर में स्थापित किए गए।
दामिनी एप से ले सकते हैं जानकारी
श्रीनगर। बारिश के दौरान होने वाले परिवर्तनों की जानकारी मोबाइल फोन यूजर्स दामिनी: बिजली चेतावनी एप से ले सकते हैं। इस एप से क्षेत्र में बिजली गिरने की संभावनाओं का अलर्ट जारी होता है। यह ऐप यह भी बताता है कि क्षेत्र में कहां बिजली चमकी या गिरी।