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12 फरवरी को होगा घृत कमल अनुष्ठान
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श्रीनगर। पौराणिक कमलेश्वर मंदिर में 12 फरवरी को माघ शुक्ल सप्तमी के दौरान घृत कमल अनुष्ठान आयोजित किया जाएगा। अनुष्ठान के दौरान शिव भगवान को विवाह के लिए मनाया जाता है।
कमलेश्वर मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार तारकासुर दैत्य ने ब्रहमा जी से वरदान प्राप्त किया था उसकी मृत्यु शिव के पुत्र के हाथों ही संभव हो। तारकासुर जानता था कि शिव सती की मृत्यु के बाद साधना में लीन हो गए हैं। ऐसे में उनके पुत्र के जन्म की कोई संभावना नहीं है। तारकासुर ने अपने अत्याचारों से पूरे ब्रहमांड में हाहाकार मचा दिया था। तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित सभी देवता भगवती का आह्वान करते हैं। जिस पर भगवती हिमालय पुत्री उमा (नंदा) के रूप में जन्म लेती है। अब सभी देवता शिव को विवाह के लिए मनाते हैं। इस दौरान शिव के लिए नाना प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। लिंग को घृत से आच्छादित किया जाता है। मंहत लिंग के चारों ओर दिगंबर अवस्था में लोट लगाते हैं। मंहत पुरी ने बताया कि यह अनुष्ठान रात्रि 8 बजे से प्रारंभ होगा। उक्त अनुष्ठान हर वर्ष क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए आयोजित किया जाता है। मंहत ने स्थानीय लोगों से अनुष्ठान में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।
कमलेश्वर मंदिर के महंत आशुतोष पुरी ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार तारकासुर दैत्य ने ब्रहमा जी से वरदान प्राप्त किया था उसकी मृत्यु शिव के पुत्र के हाथों ही संभव हो। तारकासुर जानता था कि शिव सती की मृत्यु के बाद साधना में लीन हो गए हैं। ऐसे में उनके पुत्र के जन्म की कोई संभावना नहीं है। तारकासुर ने अपने अत्याचारों से पूरे ब्रहमांड में हाहाकार मचा दिया था। तारकासुर के अत्याचार से पीड़ित सभी देवता भगवती का आह्वान करते हैं। जिस पर भगवती हिमालय पुत्री उमा (नंदा) के रूप में जन्म लेती है। अब सभी देवता शिव को विवाह के लिए मनाते हैं। इस दौरान शिव के लिए नाना प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। लिंग को घृत से आच्छादित किया जाता है। मंहत लिंग के चारों ओर दिगंबर अवस्था में लोट लगाते हैं। मंहत पुरी ने बताया कि यह अनुष्ठान रात्रि 8 बजे से प्रारंभ होगा। उक्त अनुष्ठान हर वर्ष क्षेत्र की सुख समृद्धि के लिए आयोजित किया जाता है। मंहत ने स्थानीय लोगों से अनुष्ठान में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण करने की अपील की है।
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