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मॉडल गांव बनाकर पलायन रोकने की कवायद
Updated Tue, 14 Aug 2018 11:04 PM IST
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पौड़ी। उत्तराखंड से पलायन रोकने के लिए पलायन आयोग अलग-अलग जिलों में मॉडल गांव तैयार करके पलायन रोकने की कवायद में जुट गया है। आयोग की ओर से सबसे पहले ऐसे गांवों को चयनित किया जा रहा है, जहां पर 50 प्रतिशत से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं। इन गांवों से और परिवार पलायन न करें, इसके लिए आयोग ने योजना तैयार की है। इसकी शुरुआत मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के गृह जिले पौड़ी और अल्मोड़ा से होगी।
आयोग की ओर से गांवों के चयन के लिए ग्राम विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति किया गया है। अधिकारियों ने पौड़ी जिले के 15 ब्लॉक और अल्मोड़ा के 11 जिलों में सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया है। पौड़ी जिले में प्रति ब्लॉक से दो से तीन गांव, जबकि अल्मोड़ा जिले में प्रति ब्लॉक से तीन से चार गांवों को शामिल किया जाना है। हालांकि जो गांव पूरी तरह से पलायन कर चुके हैं, उन गांवों को फिलहाल योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।
गांवों का चयन कर ऐसे रोका जाएगा पलायन
पलायन आयोग की मानें तो पौड़ी जिले में 30 से 35 गांव, जबकि अल्मोड़ा जिले में 25 से 30 गांवों का चयन कर टीम प्रत्येक गांव में जाएगी। यहां पर पलायन का कारण पूछा जाएगा। यदि रोजगार के कारण गांव में पलायन हुआ है तो वहां पर स्वरोजगार की योजनाएं शुरू की जाएंगी। जिस गांव में कृषि योग्य भूमि है, वहां पर नौजवानों को खेतीबाड़ी की ट्रेनिंग दी जाएगी। बैंकों से नौजवानों को उचित ब्याज दरों पर लोन की सुविधा भी दी जाएगी।
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कोट्स
गांवों से पलायन रोकने के लिए मॉडल गांव बनाने की योजना शुरू की गई है। योजना के तहत ऐसे गांवों का चयन किया जा रहा है, जहां पर अधिक पलायन न हुआ हो। इसके लिए उन्हें मॉडल बनाकर पलायन रोकने की कोशिश होगी।
- गोविंद सिंह धामी, यंग प्रोफेशनल, ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग पौड़ी।
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आयोग की ओर से गांवों के चयन के लिए ग्राम विकास अधिकारी, खंड विकास अधिकारी और ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति किया गया है। अधिकारियों ने पौड़ी जिले के 15 ब्लॉक और अल्मोड़ा के 11 जिलों में सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया है। पौड़ी जिले में प्रति ब्लॉक से दो से तीन गांव, जबकि अल्मोड़ा जिले में प्रति ब्लॉक से तीन से चार गांवों को शामिल किया जाना है। हालांकि जो गांव पूरी तरह से पलायन कर चुके हैं, उन गांवों को फिलहाल योजना में शामिल नहीं किया जाएगा।
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गांवों का चयन कर ऐसे रोका जाएगा पलायन
पलायन आयोग की मानें तो पौड़ी जिले में 30 से 35 गांव, जबकि अल्मोड़ा जिले में 25 से 30 गांवों का चयन कर टीम प्रत्येक गांव में जाएगी। यहां पर पलायन का कारण पूछा जाएगा। यदि रोजगार के कारण गांव में पलायन हुआ है तो वहां पर स्वरोजगार की योजनाएं शुरू की जाएंगी। जिस गांव में कृषि योग्य भूमि है, वहां पर नौजवानों को खेतीबाड़ी की ट्रेनिंग दी जाएगी। बैंकों से नौजवानों को उचित ब्याज दरों पर लोन की सुविधा भी दी जाएगी।
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गांवों से पलायन रोकने के लिए मॉडल गांव बनाने की योजना शुरू की गई है। योजना के तहत ऐसे गांवों का चयन किया जा रहा है, जहां पर अधिक पलायन न हुआ हो। इसके लिए उन्हें मॉडल बनाकर पलायन रोकने की कोशिश होगी।
- गोविंद सिंह धामी, यंग प्रोफेशनल, ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग पौड़ी।