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श्रीनगर के देवांग ने आईआईटी प्रवेश परीक्षा में पायी सफलता
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श्रीनगर। शहर के डांग गांव निवासी दिवांग उनियाल ने जेईई एडवांस में अखिल भारतीय स्तर पर 1997 रैंक हासिल की है। देवांग को पहले प्रयास में ही आईआईटी में प्रवेश करने में सफलता मिली है। देवांग कहते हैं कि सोशल मीडिया से दूरी बनाकर परीक्षा में सफलता हासिल की है।
देवांग के पिता डा. एनपी उनियाल डायट में चड़ीगांव (पौड़ी) और माता सविता उनियाल राजकीय इंटर कॉलेज न्यूली अकरी में शिक्षिका हैं। देवांग ने आईआईटी की तैयारी के लिए हाईस्कूल उत्तीर्ण करने के बाद कोटा (राजस्थान) के एक स्कूल में एडमिशन ले लिया था। स्कूल की पढ़ाई के साथ ही उसने दो साल तक आईआईटी प्रवेश परीक्षा की कोचिंग ली। जेईई मेन्स में देवांग ने 99.91 परसेंटाइल हासिल कर 1115 रेंक पाई थी। 27 मई को जेईई एडवांस की परीक्षा हुई, जबकि 14 जून को इसके नतीजे आ गए। देवांग को पहले प्रयास में 1997 वीं रैंक मिली, जिससे उनका आईआईटी मेें दाखिला तय है। इससे पूर्व देवांग बिट्स पिलानी की प्रवेश परीक्षा में भी सफलता हासिल कर चुके हैं। देवांग ने बताया कि आईआईटी की तैयारी के लिए वह दो साल सोशल मीडिया से दूर रहा। परिजनों से संपर्क करने के लिए उसने कीपेड फोन रखा। परीक्षा की तैयारी के दौरान कई कठिन क्षण आए, जिसको निरंतर अभ्यास व शिक्षकों के मार्गदर्शन ने आसान कर दिया। उसने बताया कि नानी प्रेमा देवी पिछले दो सालों से कोटा में रहकर उसका मार्गदर्शन करने के साथ ही हौसला बढ़ाती रहीं।
देवांग के पिता डा. एनपी उनियाल डायट में चड़ीगांव (पौड़ी) और माता सविता उनियाल राजकीय इंटर कॉलेज न्यूली अकरी में शिक्षिका हैं। देवांग ने आईआईटी की तैयारी के लिए हाईस्कूल उत्तीर्ण करने के बाद कोटा (राजस्थान) के एक स्कूल में एडमिशन ले लिया था। स्कूल की पढ़ाई के साथ ही उसने दो साल तक आईआईटी प्रवेश परीक्षा की कोचिंग ली। जेईई मेन्स में देवांग ने 99.91 परसेंटाइल हासिल कर 1115 रेंक पाई थी। 27 मई को जेईई एडवांस की परीक्षा हुई, जबकि 14 जून को इसके नतीजे आ गए। देवांग को पहले प्रयास में 1997 वीं रैंक मिली, जिससे उनका आईआईटी मेें दाखिला तय है। इससे पूर्व देवांग बिट्स पिलानी की प्रवेश परीक्षा में भी सफलता हासिल कर चुके हैं। देवांग ने बताया कि आईआईटी की तैयारी के लिए वह दो साल सोशल मीडिया से दूर रहा। परिजनों से संपर्क करने के लिए उसने कीपेड फोन रखा। परीक्षा की तैयारी के दौरान कई कठिन क्षण आए, जिसको निरंतर अभ्यास व शिक्षकों के मार्गदर्शन ने आसान कर दिया। उसने बताया कि नानी प्रेमा देवी पिछले दो सालों से कोटा में रहकर उसका मार्गदर्शन करने के साथ ही हौसला बढ़ाती रहीं।
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