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सड़क न होने से पलायन को विवश ग्रामीण
Updated Mon, 09 Oct 2017 10:51 PM IST
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पाबौ। पाबौ ब्लॉक की बालीकंडारस्यूं पट्टी के कुछ गांव आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। सड़क मार्ग से न जुड़ पाने के कारण ग्रामीण इन गांवों कोे छोड़ने के लिए मजबूर हैं।
गढ़वाल मंडल मुख्यालय से महज 50 किलोमीटर दूर स्थित बालीकंडारस्यूं पट्टी के देवकोट, घुमकी, डोलडुगा, कुलयाणी गांवों में आजादी के 70 साल बाद भी सड़क नहीं पहुंच पाई है। आज भी लोगों को रोजमर्रा का सामान कई किलोमीटर से पैदल लाना पड़ता है। हादसे में घायल होने पर, बीमार और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए चारपाई पर पैदल अस्पताल पहुंचाते हैं। इन गांवों से पांच किलोमीटर से अधिक के जंगल वाले रास्ते से मुख्य मार्ग सैंजी, नौठा तक पहुंचाया जाता है। पाबौ ब्लॉक में पड़ने वाले इन गांवों के लोग अभी भी बस पकड़ने के लिए गांव से पांच किलोमीटर दूर सैंजी या नौठा तक पैदल पहुंचते हैं। सड़क सुविधा के अभाव में इस गांव में रह रहे लोगों को कई परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। इससे इस गांव में रहने वाले परिवार एक-एक गांव को छोड़ रहे हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र नौटियाल ने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। माधो सिंह, आनंदमणि, सावर सिंह, सुरेंद्र सिंह, बालम सिंह बताते हैं कि गांव में सड़क न होने से उन्हें बस पकड़ने के लिए पांच किलोमीटर दूर सैंजी या नौठा आना पड़ता है। इससे उन्हें खासी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
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गढ़वाल मंडल मुख्यालय से महज 50 किलोमीटर दूर स्थित बालीकंडारस्यूं पट्टी के देवकोट, घुमकी, डोलडुगा, कुलयाणी गांवों में आजादी के 70 साल बाद भी सड़क नहीं पहुंच पाई है। आज भी लोगों को रोजमर्रा का सामान कई किलोमीटर से पैदल लाना पड़ता है। हादसे में घायल होने पर, बीमार और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए चारपाई पर पैदल अस्पताल पहुंचाते हैं। इन गांवों से पांच किलोमीटर से अधिक के जंगल वाले रास्ते से मुख्य मार्ग सैंजी, नौठा तक पहुंचाया जाता है। पाबौ ब्लॉक में पड़ने वाले इन गांवों के लोग अभी भी बस पकड़ने के लिए गांव से पांच किलोमीटर दूर सैंजी या नौठा तक पैदल पहुंचते हैं। सड़क सुविधा के अभाव में इस गांव में रह रहे लोगों को कई परेशानियां उठानी पड़ रही हैं। इससे इस गांव में रहने वाले परिवार एक-एक गांव को छोड़ रहे हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र नौटियाल ने बताया कि ग्रामीण लंबे समय से सड़क बनाने की मांग कर रहे हैं। माधो सिंह, आनंदमणि, सावर सिंह, सुरेंद्र सिंह, बालम सिंह बताते हैं कि गांव में सड़क न होने से उन्हें बस पकड़ने के लिए पांच किलोमीटर दूर सैंजी या नौठा आना पड़ता है। इससे उन्हें खासी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
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