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मलेथा के खेतों में 108 कलाकरों ने किया माधो ङ्क्षसह भंडारी नृत्य नाटिका का मंचन
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श्रीनगर। वीर भड़ माधो सिंह भंडारी के शौर्य, वीरता, बलिदान पर आधारित गीत-नृत्य नाटिका का मलेथा के खेतों में शानदार मंचन किया गया। इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रदेश के उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धन सिंह रावत ने माधो सिंह भंडारी के स्मारक व गूल के जीर्णोद्धार के लिए डेढ़ करोड़ की घोषणा की है।
रविवार को पर्वतीय नाट्य मंच मुंबई के 108 कलाकारों ने वीर शिरोमणी माधो सिंह भंडारी की 424 वीं जयंती पर उनके जीवन को नाटक के माध्यम से दिखाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कलश यात्रा व मां नंदा देवी डोली से किया गया, जिसके बाद मुख्य अतिथि डा.धन सिंह रावत व कार्यक्रम अध्यक्ष विधायक विनोद कंडारी ने माधो सिंह भंडारी गीत-नृत्य नाटिका कार्यक्रम का उद्घाटन किया। नृत्य नाटिका के पहले दृश्य में गढ़वाल व कुमाऊं पर तिब्बत की ओर से आक्रमण किए जाने पर राजा महिपत शाह वीर भड़ माधो सिंह को अपने दरबार में बुलाते है। उन्हें सेनापति नियुक्त कर सेना के साथ तिब्बत पर आक्रमण के लिए भेजते है। सीमा पर उनकी उदीना से भेंट हो जाती है, लेकिन कुछ ही समय बाद उदीना का विवाह जालंधर के गंगू भड़ से तय किया जाता है। तिब्बत से युद्ध में विजय हासिल करने के बाद। माधो सिंह गंगू भड़ व उसकी सेना को पराजित कर उदीना की डोली लेकर वापस पहुंचते है। जहां उनका भव्य स्वागत किया जाता है। विभिन्न युद्धों में विजय हासिल करने पर माधो सिंह भंडारी को राजा महिपत शाह की ओर से मलेथा की विशाल समतल भूमि उपहार में दी जाती है। अलकनंदा नदी से सटी भूमि की सिंचाई उनके सम्मुख समस्या बन गई। माधो सिंह भंडारी ने इस भूमि की सिंचाई के लिए डांगचौरा गदेरे (चंद्रभागा) से गूल बनाना शुरू कर दिया। गूल के मार्ग में पहाड़ी आने से उन्होंने इसे भेद कर सुरंग का निर्माण करवाया, लेकिन गूल तैयार होने के बाद भी खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। स्वप्न में देवी ने कहा कि गूल बलिदान मांग रही है। इस पर माधो सिंह भंडारी ने अपने पुत्र वीर सिंह का बलिदान कर मलेथा के खेतों को सदा के लिए हराभरा कर दिया। इस मौके पर मलेथा के करीब एक दर्जन से अधिक किसानों को उद्यान व कृषि विभाग की ओर से कृषि उपकरण व यंत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में जागर सम्राट प्रीतम भरत्वाण, मीना राणा, एसडीएम अनुराधा पाल, पालिका अध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम, नगर पंचायत अध्यक्षा कैलाशी देवी, प्रधान शूरवीर बिष्ट, पर्वतीय नाट्य मंच मुंबई के बलदेव राणा, राजेंद्र रावत, विक्रम कप्रवाण व साथी कलाकार मौजूद थे।
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रविवार को पर्वतीय नाट्य मंच मुंबई के 108 कलाकारों ने वीर शिरोमणी माधो सिंह भंडारी की 424 वीं जयंती पर उनके जीवन को नाटक के माध्यम से दिखाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कलश यात्रा व मां नंदा देवी डोली से किया गया, जिसके बाद मुख्य अतिथि डा.धन सिंह रावत व कार्यक्रम अध्यक्ष विधायक विनोद कंडारी ने माधो सिंह भंडारी गीत-नृत्य नाटिका कार्यक्रम का उद्घाटन किया। नृत्य नाटिका के पहले दृश्य में गढ़वाल व कुमाऊं पर तिब्बत की ओर से आक्रमण किए जाने पर राजा महिपत शाह वीर भड़ माधो सिंह को अपने दरबार में बुलाते है। उन्हें सेनापति नियुक्त कर सेना के साथ तिब्बत पर आक्रमण के लिए भेजते है। सीमा पर उनकी उदीना से भेंट हो जाती है, लेकिन कुछ ही समय बाद उदीना का विवाह जालंधर के गंगू भड़ से तय किया जाता है। तिब्बत से युद्ध में विजय हासिल करने के बाद। माधो सिंह गंगू भड़ व उसकी सेना को पराजित कर उदीना की डोली लेकर वापस पहुंचते है। जहां उनका भव्य स्वागत किया जाता है। विभिन्न युद्धों में विजय हासिल करने पर माधो सिंह भंडारी को राजा महिपत शाह की ओर से मलेथा की विशाल समतल भूमि उपहार में दी जाती है। अलकनंदा नदी से सटी भूमि की सिंचाई उनके सम्मुख समस्या बन गई। माधो सिंह भंडारी ने इस भूमि की सिंचाई के लिए डांगचौरा गदेरे (चंद्रभागा) से गूल बनाना शुरू कर दिया। गूल के मार्ग में पहाड़ी आने से उन्होंने इसे भेद कर सुरंग का निर्माण करवाया, लेकिन गूल तैयार होने के बाद भी खेतों तक पानी नहीं पहुंचा। स्वप्न में देवी ने कहा कि गूल बलिदान मांग रही है। इस पर माधो सिंह भंडारी ने अपने पुत्र वीर सिंह का बलिदान कर मलेथा के खेतों को सदा के लिए हराभरा कर दिया। इस मौके पर मलेथा के करीब एक दर्जन से अधिक किसानों को उद्यान व कृषि विभाग की ओर से कृषि उपकरण व यंत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में जागर सम्राट प्रीतम भरत्वाण, मीना राणा, एसडीएम अनुराधा पाल, पालिका अध्यक्ष पौड़ी यशपाल बेनाम, नगर पंचायत अध्यक्षा कैलाशी देवी, प्रधान शूरवीर बिष्ट, पर्वतीय नाट्य मंच मुंबई के बलदेव राणा, राजेंद्र रावत, विक्रम कप्रवाण व साथी कलाकार मौजूद थे।
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