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गैरसैण स्थाई राजधानी की मांग को लेकर प्रदर्शन
Updated Fri, 09 Mar 2018 10:32 PM IST
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पौड़ी। गैरसैंण स्थायी राजधानी की मांग को लेकर नागरिक कल्याण मंच ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते हुए डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।
नागरिक कल्याण मंच के कार्यकर्ता शुक्रवार को कलक्ट्रेट में एकत्रित हुए। उन्होंने गैरसैंण स्थायी राजधानी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भी प्रेषित किया। इस दौरान मंच के संयोजक रघुवीर सिंह रावत, एल मोहन कोठियाल व एसएस पंवार ने कहा कि वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था तो देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया और गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया गया, लेकिन अभी तक रही सरकारों ने अपनी सुविधा के लिए गैरसैंण के स्थान पर गुपचुप ढंग से देहरादून को स्थायी राजधानी बनाने के एजेंडे पर काम किया। इसमें दीक्षित आयोग की रिपोर्ट को भी सरकारों ने नजरअंदाज किया। आज राज्य के नौ पहाड़ी जिलों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। गैरसैंण दोनों मंडलों का केंद्रबिंदु है, इसलिए जल्द ही इसको स्थायी राजधानी बनाना चाहिए। प्रदर्शन करने वालों में गिरीश चंद्र बड़थ्वाल, चंद्रमोहन, आलम सिंह, केदार सिंह, ठाकुर सिंह, भगवान सिंह, देवानंद नौटियाल व सत्य प्रसाद धस्माना आदि शामिल रहे।
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नागरिक कल्याण मंच के कार्यकर्ता शुक्रवार को कलक्ट्रेट में एकत्रित हुए। उन्होंने गैरसैंण स्थायी राजधानी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भी प्रेषित किया। इस दौरान मंच के संयोजक रघुवीर सिंह रावत, एल मोहन कोठियाल व एसएस पंवार ने कहा कि वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ था तो देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया और गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित किया गया, लेकिन अभी तक रही सरकारों ने अपनी सुविधा के लिए गैरसैंण के स्थान पर गुपचुप ढंग से देहरादून को स्थायी राजधानी बनाने के एजेंडे पर काम किया। इसमें दीक्षित आयोग की रिपोर्ट को भी सरकारों ने नजरअंदाज किया। आज राज्य के नौ पहाड़ी जिलों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। गैरसैंण दोनों मंडलों का केंद्रबिंदु है, इसलिए जल्द ही इसको स्थायी राजधानी बनाना चाहिए। प्रदर्शन करने वालों में गिरीश चंद्र बड़थ्वाल, चंद्रमोहन, आलम सिंह, केदार सिंह, ठाकुर सिंह, भगवान सिंह, देवानंद नौटियाल व सत्य प्रसाद धस्माना आदि शामिल रहे।