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अस्पताल की चारपाई पर जीवन- मौत से जूझता हुड़का वादक
Updated Mon, 29 Jan 2018 10:24 PM IST
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पौड़ी। उत्तराखंड की लोक संस्कृति व संगीत को हुड़के से जीवन देने वाला 39 वर्षीय लोक कलाकार भक्तिलाल शाह जिला अस्पताल में जीवन व मृत्यु से जूझ रहा है। फेफड़ों में संक्रमण की वजह से उसके मुंह से खून निकल रहा है। भक्ति लाल के पास इलाज को पैसा नहीं है, लेकिन उसकी मदद को अब तक कोई आगे नहीं आया है। इलाज कर रहे डाक्टर विनोद का कहना है भक्तिलाल की हालात नाजुक है और उसे किसी बड़े अस्पताल में इलाज की जरूरत है।
भक्तिलाल शाह के पिता जन्मांध भरोसी लाल पौड़ी बस अड्डे के नजदीक कभी पहाड़ी वाद्य यंत्र ढौंर पर ‘ब्यै जहाज मां जाण कि ना’ जैसे लोक गीत गाया करते थे। एक वाहन की टक्कर से उनकी मौत हो गई। उसके बाद भक्तिलाल शाह ने वाद्ययंत्र हुड़के से आजीविका चलानी शुरू की। गढ़वाल में एकमात्र हुड़का वादक भक्तिलाल शाह को इस विद्या के लिए पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। उन्होंने लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, अनिल बिष्ट, मंगलेश डंगवाल, वीरेंद्र राजपूत, मीना राणा, अमित सागर जैसे कलाकारों के साथ संगत दी। 20 जनवरी 2018 को भी वह कण्वाश्रम बसंतोत्सव कोटद्वार में मांगल गीत प्रतियोगिता के निर्णायक व हुड़के की एकल प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किए गए थे, जहां कार्यक्रम के बीच में अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई। उनका जिला चिकित्सालय पौड़ी में उपचार चल रहा है, लेकिन उसके पास इलाज को पैसा नहीं है।
भक्तिलाल शाह के पिता जन्मांध भरोसी लाल पौड़ी बस अड्डे के नजदीक कभी पहाड़ी वाद्य यंत्र ढौंर पर ‘ब्यै जहाज मां जाण कि ना’ जैसे लोक गीत गाया करते थे। एक वाहन की टक्कर से उनकी मौत हो गई। उसके बाद भक्तिलाल शाह ने वाद्ययंत्र हुड़के से आजीविका चलानी शुरू की। गढ़वाल में एकमात्र हुड़का वादक भक्तिलाल शाह को इस विद्या के लिए पुरस्कारों से सम्मानित भी किया गया है। उन्होंने लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी, अनिल बिष्ट, मंगलेश डंगवाल, वीरेंद्र राजपूत, मीना राणा, अमित सागर जैसे कलाकारों के साथ संगत दी। 20 जनवरी 2018 को भी वह कण्वाश्रम बसंतोत्सव कोटद्वार में मांगल गीत प्रतियोगिता के निर्णायक व हुड़के की एकल प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किए गए थे, जहां कार्यक्रम के बीच में अचानक उनकी तबियत बिगड़ गई। उनका जिला चिकित्सालय पौड़ी में उपचार चल रहा है, लेकिन उसके पास इलाज को पैसा नहीं है।
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