{"_id":"5b4e288c4f1c1b48748b562d","slug":"101531848844-pauri-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रांसी स्टेडियम का नाम हो शहीद जसवंत सिंह महावीर चक्र स्टेडियम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रांसी स्टेडियम का नाम हो शहीद जसवंत सिंह महावीर चक्र स्टेडियम
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:04 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पौड़ी। पूर्व सैनिक कल्याण संगठन की पूर्व सैनिक मिलन केंद्र मांडाखाल में आयोजित बैठक में राइफलमैन महावीर चक्र विजेता शहीद जसवंत सिंह के नाम पर रांसी स्टेडियम का नाम रखने की मांग की गई। पूर्व सैनिकों ने कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के इस जांबाज को उत्तराखंड में भुला दिया गया है।
पूर्व सैनिक संगठन पौड़ी के सचिव राजेंद्र सिंह राणा ने कहा कि राइफलमैन जसवंत सिंह मूल रूप से ग्राम बाडीयू, पट्टी खाटली बीरोंखाल जनपद पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले थे। चौथी गढ़वाल राइफल्स के इस राइफलमैन ने 1962 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर अरुणाचल प्रदेश के तवांग में देश के भीतर घुसे तीन सौ चीनी सैनिकों को मार गिराया। चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए जसवंत सिंह भी नुरानांग स्थान पर शहीद हो गए। इसके अदम्य साहस को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से नवाजा गया। वहीं अरुणाचल प्रदेश में उनके नाम का मंदिर बना है, लेकिन उत्तराखंड में उनके नाम पर कोई, सड़क, स्मारक या फिर कोई ऐसा स्थान नहीं है। जिसे देख उनकी याद को ताजा किया जा सके। बैठक में संगठन के अध्यक्ष कैप्टन महावीर सिंह रावत, सते सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह गुसाईं, सुरेंद्र सिंह रावत, मंगल सिंह असवाल, मातवर सिंह नेगी, मंगल सिंह, एसपी धस्माना, ओपी काला, सुरेंद्र सिंह रावत, राजेंद्र सिंह रावत, भुवन चंद्र बड़थ्वाल, मनवर सिंह, राजेंद्र सिंह नेगी, हर्ष सिंह रावत व रणवीर सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
पूर्व सैनिक संगठन पौड़ी के सचिव राजेंद्र सिंह राणा ने कहा कि राइफलमैन जसवंत सिंह मूल रूप से ग्राम बाडीयू, पट्टी खाटली बीरोंखाल जनपद पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले थे। चौथी गढ़वाल राइफल्स के इस राइफलमैन ने 1962 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर अरुणाचल प्रदेश के तवांग में देश के भीतर घुसे तीन सौ चीनी सैनिकों को मार गिराया। चीनी सैनिकों से लोहा लेते हुए जसवंत सिंह भी नुरानांग स्थान पर शहीद हो गए। इसके अदम्य साहस को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से नवाजा गया। वहीं अरुणाचल प्रदेश में उनके नाम का मंदिर बना है, लेकिन उत्तराखंड में उनके नाम पर कोई, सड़क, स्मारक या फिर कोई ऐसा स्थान नहीं है। जिसे देख उनकी याद को ताजा किया जा सके। बैठक में संगठन के अध्यक्ष कैप्टन महावीर सिंह रावत, सते सिंह बिष्ट, राजेंद्र सिंह गुसाईं, सुरेंद्र सिंह रावत, मंगल सिंह असवाल, मातवर सिंह नेगी, मंगल सिंह, एसपी धस्माना, ओपी काला, सुरेंद्र सिंह रावत, राजेंद्र सिंह रावत, भुवन चंद्र बड़थ्वाल, मनवर सिंह, राजेंद्र सिंह नेगी, हर्ष सिंह रावत व रणवीर सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन