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राज्य आंदोलन में सक्रिय भागीदारी पर चिह्नित नहीं होने साल रहा दर्द
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चिन्हीकरण से वंचित आंदोलनकारी चंपा चिलवाल । विज्ञप्ति
हल्द्वानी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महिला, पुरुष, छात्र ही नहीं बल्कि सरकारी कर्मचारियों ने भी प्रमुख भूमिका निभाई थी। पूरे राज्य में अलग राज्य के लिए जबरदस्त आंदोलन चला। कुछ लोगों का कहना है कि राज्य के लिए आंदोलन में हिस्सा लेने के बाद भी उन्हें आंदोलनकारी नहीं माना जाना उनके लिए काफी दुखदायी है। इन लोगों का आरोप है कि राज्य बनने के 24 साल बाद भी अब तक सत्ता में रहीं सरकारों ने राज्य आंदोलनकारियों को चिह्नित करने में ईमानदारी नहीं बरती। वंचित आंदोलनकारियों का कहना है कि अब धामी सरकार से उम्मीद है कि वह इस पर ईमानदारी से कार्यवाही करेंगे।
वर्ष 1994 में महीनों तक हर रोज गली-गली, गांव-गांव में ‘आज दो अभी दो उत्तराखंड राज्य दो’ के नारे बुलंद रहते थे। दो अक्तूबर 1994 को दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों पर चले लाठी, डंडे गोली और मातृ शक्ति के अपमान को पूरा देश नहीं भूल सकता है। 27 फीसदी आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन एकाएक राज्य आंदोलन में बदल गया। तमाम शहादतों के बाद राज्य मिला। सरकार ने कुछ आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा तो दे दिया लेकिन आज भी कई राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित हैं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद सरकारों ने आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण नहीं किया है। भाजपा शासन में राज्य का तोहफा तो मिला लेकिन आज तक चिह्नित नहीं किए जाने से हजारों आंदोलनकारी निराश हैं। आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि इस बार भाजपा सरकार राज्य गठन की वर्षगांठ पर वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर उन्हें उनका वाजिब हक देगी।
चिह्नीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों का दर्द
राज्य आंदोलन में चार महीने तक घर बार छोड़कर धरना-प्रदर्शन किया। महिलाओं को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन सरकार ने चिह्नित नहीं किया।
- नंदी देवी
कोट
राज्य आंदोलन के दौरान महिलाओं की टोलियों को साथ लेकर धरना-प्रदर्शन, रैलियों में शिरकत की। पुलिस के उत्पीड़न का डटकर मुकाबला किया। राज्य गठन के बाद सरकार हमें भूल गई।
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- चंपा चिलवाल
राज्य आंदोलन के दौरान हर कार्यक्रम में प्रमुखता से भागीदारी की। शहर के हर आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। हमारे साथ के कई लोगों को चिह्नित किया लेकिन मुझे वंचित किया गया।
- गीता चंदोला
कोट
राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद सरकार ने चिन्हीकरण नहीं किया। राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों का ही चिन्हीकरण किया गया।
- राधिका बिष्ट
कोट
राज्य आंदोलन में प्रमुख भूमिका में रही। पुलिस का उत्पीड़न भी सहा। लेकिन किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होने के कारण सरकार ने चिह्नीकरण नहीं किया।
- भगवती जोशी
कोट
- राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका में रही। दिल्ली रैली में शिरकत की। पुलिस उत्पीड़न सहा। आंसू गैस के गोले खाए, लेकिन सरकार ने चिह्नित नहीं किया।
- नीमा भट्ट
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वर्ष 1994 में महीनों तक हर रोज गली-गली, गांव-गांव में ‘आज दो अभी दो उत्तराखंड राज्य दो’ के नारे बुलंद रहते थे। दो अक्तूबर 1994 को दिल्ली जा रहे राज्य आंदोलनकारियों पर चले लाठी, डंडे गोली और मातृ शक्ति के अपमान को पूरा देश नहीं भूल सकता है। 27 फीसदी आरक्षण के विरोध में शुरू हुआ आंदोलन एकाएक राज्य आंदोलन में बदल गया। तमाम शहादतों के बाद राज्य मिला। सरकार ने कुछ आंदोलनकारियों को राज्य आंदोलनकारी का दर्जा तो दे दिया लेकिन आज भी कई राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण से वंचित हैं। कई बार गुहार लगाने के बावजूद सरकारों ने आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण नहीं किया है। भाजपा शासन में राज्य का तोहफा तो मिला लेकिन आज तक चिह्नित नहीं किए जाने से हजारों आंदोलनकारी निराश हैं। आंदोलनकारियों को उम्मीद है कि इस बार भाजपा सरकार राज्य गठन की वर्षगांठ पर वास्तविक राज्य आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण कर उन्हें उनका वाजिब हक देगी।
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चिह्नीकरण से वंचित राज्य आंदोलनकारियों का दर्द
राज्य आंदोलन में चार महीने तक घर बार छोड़कर धरना-प्रदर्शन किया। महिलाओं को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई। लेकिन सरकार ने चिह्नित नहीं किया।
- नंदी देवी
कोट
राज्य आंदोलन के दौरान महिलाओं की टोलियों को साथ लेकर धरना-प्रदर्शन, रैलियों में शिरकत की। पुलिस के उत्पीड़न का डटकर मुकाबला किया। राज्य गठन के बाद सरकार हमें भूल गई।
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- चंपा चिलवाल
राज्य आंदोलन के दौरान हर कार्यक्रम में प्रमुखता से भागीदारी की। शहर के हर आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। हमारे साथ के कई लोगों को चिह्नित किया लेकिन मुझे वंचित किया गया।
- गीता चंदोला
कोट
राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद सरकार ने चिन्हीकरण नहीं किया। राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों का ही चिन्हीकरण किया गया।
- राधिका बिष्ट
कोट
राज्य आंदोलन में प्रमुख भूमिका में रही। पुलिस का उत्पीड़न भी सहा। लेकिन किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं होने के कारण सरकार ने चिह्नीकरण नहीं किया।
- भगवती जोशी
कोट
- राज्य आंदोलन में अग्रणी भूमिका में रही। दिल्ली रैली में शिरकत की। पुलिस उत्पीड़न सहा। आंसू गैस के गोले खाए, लेकिन सरकार ने चिह्नित नहीं किया।
- नीमा भट्ट