महिला की मौत के मामले पति बरी
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अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय सहदेव सिंह की अदालत ने कंचन पलड़िया की मौत के मामले में साक्ष्यों के आधार पर पति को आरोपों से मुक्त करने का निर्णय दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी नवीन चंद्र बुधानी ने थाने में तहरीर दी कि उनकी बहन कंचन पलड़िया की शादी 12 साल पहले कुसुमखेड़ा निवासी लक्ष्मण दत्त पलड़िया के साथ हुई थी। शादी के बाद पति आए दिन उनकी बहन को मारता पीटता था। प्रताड़ना से तंग आकर उसकी बहन सल्फास खाने पर मजबूर हुई। सुशीला तिवारी अस्पताल में उपचार के दौरान 22 अक्तूबर 2011 को उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने पति के खिलाफ धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। अदालत में सुनवाई के दौरान घटना के चश्मदीद ने अभियोजन पक्ष के वाद का समर्थन नहीं किया। अधिवक्ता अभिनव छिमवाल ने बताया कि मृतका ने आवेश में आकर खुद जहर की गोली खा ली। अभियुक्त द्वारा घटना के तत्काल बाद इलाज कराया गया लेकिन राजकीय चिकित्सालय में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पति निर्दोष है। अदालत में अभियोजन की तरफ से एडीजीसी पीएस बोरा ने अपना पक्ष रखा। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोपी लक्ष्मण दत्ता पलड़िया को दोषमुक्त कर दिया।