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कॉर्बेट में सुधरेगी वन्यजीवों की सेहत
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रामनगर (नैनीताल)। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कॉर्बेट पार्क के ढेला रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों का उपचार शुरू हो गया है। अब वन्यजीवों के इलाज के लिए वन विभाग को परेशान नहीं होना पड़ेगा। रेस्क्यू सेंटर में सभी तरह की सुविधाएं मौजूद हैं। सेंटर में घायल बाघ और तेंदुए का एक्स रे के बाद उपचार किया जा रहा है।
साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉर्बेट पार्क के भ्रमण पर आए थे, तब उन्होंने वन्यजीवों के उपचार के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाने की घोषणा की थी। चार करोड़ की लागत से ढेला रेंज में रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य अंतिम दौर में है। इस सेंटर में घायल वन्यजीवों का उपचार होगा और स्वस्थ होने पर उन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा। रेस्क्यू सेंटर में तेंदुओं के लिए दस और बाघों के लिए छह बाड़े बनाए गए हैं। एक अस्पताल भी बनाया है जिसमें वन्यजीवों का उपचार शुरू हो गया है।
पहले ये थीं परेशानियां
- आपसी संघर्ष में घायल होने पर वन्यजीवों को उपचार के लिए रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ता था।
- बाघ या अन्य वन्यजीव की हड्डी टूटने के बाद एक्स रे कराने के लिए परेशान होना पड़ता था।
- डॉक्टर के न होने पर वन्यजीव के शव को डीप फ्रिजर में रखने की सुविधा नहीं थी।
- कई बार आसपास के रेस्क्यू सेंटर फुल होने पर रेस्क्यू किए गए वन्यजीव को रखने की परेशानी होती थी।
अब ये हैं सुविधाएं
- हाल ही में रेस्क्यू सेंटर में घायल एक बाघ और एक तेंदुए का एक्स रे किया गया। दोनों आपसी संघर्ष में घायल हुए थे।
- रेस्क्यू सेंटर में ही पोस्टमार्टम हाउस भी बनाया गया है ताकि संक्रमण से बचा जा सके। डीप फ्रीजर की सुविधा भी है।
- रेस्क्यू सेंटर 30 हेक्टेयर क्षेत्र में बना है, यहां पर तेंदुआ, बाघ सहित अन्य वन्यजीवों को रखने की सुविधा है।
- रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों के उपचार के लिए सभी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ढेला रेस्क्यू सेंटर में अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं। अब वन्यजीवों का बेहतर उपचार हो सकेगा। आपसी संघर्ष में घायल होने वाले वन्यजीवों को अब उपचार मिलने में देरी नहीं होगी।
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- डॉ. दुष्यंत शर्मा, पशु चिकित्सक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व
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साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कॉर्बेट पार्क के भ्रमण पर आए थे, तब उन्होंने वन्यजीवों के उपचार के लिए रेस्क्यू सेंटर बनाने की घोषणा की थी। चार करोड़ की लागत से ढेला रेंज में रेस्क्यू सेंटर का निर्माण कार्य अंतिम दौर में है। इस सेंटर में घायल वन्यजीवों का उपचार होगा और स्वस्थ होने पर उन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा। रेस्क्यू सेंटर में तेंदुओं के लिए दस और बाघों के लिए छह बाड़े बनाए गए हैं। एक अस्पताल भी बनाया है जिसमें वन्यजीवों का उपचार शुरू हो गया है।
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पहले ये थीं परेशानियां
- आपसी संघर्ष में घायल होने पर वन्यजीवों को उपचार के लिए रानीबाग रेस्क्यू सेंटर भेजना पड़ता था।
- बाघ या अन्य वन्यजीव की हड्डी टूटने के बाद एक्स रे कराने के लिए परेशान होना पड़ता था।
- डॉक्टर के न होने पर वन्यजीव के शव को डीप फ्रिजर में रखने की सुविधा नहीं थी।
- कई बार आसपास के रेस्क्यू सेंटर फुल होने पर रेस्क्यू किए गए वन्यजीव को रखने की परेशानी होती थी।
अब ये हैं सुविधाएं
- हाल ही में रेस्क्यू सेंटर में घायल एक बाघ और एक तेंदुए का एक्स रे किया गया। दोनों आपसी संघर्ष में घायल हुए थे।
- रेस्क्यू सेंटर में ही पोस्टमार्टम हाउस भी बनाया गया है ताकि संक्रमण से बचा जा सके। डीप फ्रीजर की सुविधा भी है।
- रेस्क्यू सेंटर 30 हेक्टेयर क्षेत्र में बना है, यहां पर तेंदुआ, बाघ सहित अन्य वन्यजीवों को रखने की सुविधा है।
- रेस्क्यू सेंटर में वन्यजीवों के उपचार के लिए सभी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।
ढेला रेस्क्यू सेंटर में अत्याधुनिक उपकरण लगाए जा रहे हैं। अब वन्यजीवों का बेहतर उपचार हो सकेगा। आपसी संघर्ष में घायल होने वाले वन्यजीवों को अब उपचार मिलने में देरी नहीं होगी।
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- डॉ. दुष्यंत शर्मा, पशु चिकित्सक, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व