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‘डिहाइड्रेशन’ के शिकार हो रहे जंगली जानवर

Tue, 02 May 2017 02:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 02 May 2017 02:33 AM IST
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Wild animals hunting for 'dehydration'
खटीमा में वन्य जंतुओं के पानी पीने के लिए वन विभाग द्वारा पानी से भरे गए वाटर होल - फोटो : अमर उनाला

जंगली जानवर डिहाइड्रेशन के शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह से जानवरों के व्यवहार में भी बदलाव हो रहा है। वह प्यास बुझाने के लिए आबादी की ओर रुख कर रहे हैं और बदलते व्यवहार के कारण ‘आसान शिकार’ को निवाला बना रहे हैं। नतीजा मानव वन्य जीव संघर्ष बढ़ने की आशंका और पुख्ता होती जा रही है।

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सूत्रों के अनुसार बाघ, गुलदार जैसे जानवर जंगल में ही जल स्रोतों से प्यास मिटाते हैं। इधर जंगलों में इंसानी घुसपैठ बढ़ी है। ग्लोबल वार्मिंग, खनन, वनों के कटान, बारिश की कमी से जंगलों में पानी के जल स्रोत तेजी से सूख रहे हैं।
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गर्मियों में हालत बदतर हो गए हैं। जल स्रोतों के सूखने से जानवरों को भी पानी की कमी से जूझना पड़ा। बाघ, गुलदार, हाथी, हिरन वगैरह डिहाइड्रेशन के शिकार हो रहे हैं। पानी की तलाश में जानवर आबादी की ओर रुख कर रहे हैं।
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सूत्रों की माने तो पानी की कमी से थकान, कमजोरी महसूस करते हैं। ऐसे में इन जानवरों के व्यवहार में बदलाव आ रहा है। गर्मी में प्यास बुझाने के लिए ये आबादी के आसपास ही बने रहते हैं।


कमजोरी की वजह से जंगल में शिकार करने की अपेक्षा आसान शिकार को निशाना बनाते हैं। बाद में यही ईजी फूड जानवरों की आदत बन जाता है जो सीधे तौर पर मानव वन्य जीव संघर्ष को बढ़ावा देता है। इधर वन महकमा जंगलों में जल स्रोतों में टैंकर से पानी तो भर रहा है, लेकिन यह नाकाफी है।

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