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Nainital News: प्याज पर चढ़ी महंगाई की परत
Tue, 25 Aug 2026 02:44 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 25 Aug 2026 02:44 AM IST
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हल्द्वानी। कुमाऊं की सबसे बड़ी थोक सब्जी मंडी हल्द्वानी में प्याज की कीमतों पर महंगाई की परतें चढ़ती जा रही हैं। आवक घटने से थोक बाजार में प्याज के दाम एक सप्ताह में 10 से 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। गुणवत्ता के अनुसार अब प्याज 40 से 50 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। कीमत बढ़ने का असर मांग पर भी पड़ा है और व्यापारियों ने नए ऑर्डर करीब 30 प्रतिशत तक घटा दिए हैं।
हल्द्वानी मंडी में प्याज की आपूर्ति मुख्य रूप से नासिक, इंदौर और गुजरात से हो रही है। तीनों राज्यों से पहले जहां रोजाना 60 से 72 टन तक प्याज पहुंच रहा था, वहीं अब आवक घटकर करीब 36 से 48 टन प्रतिदिन रह गई है। इन दिनों दो से चार ट्रक ही रोजाना मंडी पहुंच रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक लंबी दूरी और रास्ते में जाम व यातायात संबंधी व्यवधानों का असर भी प्याज की आवक पर पड़ा है।
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तीन राज्यों की आवक पर टिका कुमाऊं
हल्द्वानी मंडी से ही कुमाऊं के सभी जिलों में प्याज की आपूर्ति होती है। आवक घटने और कीमत बढ़ने से बाजार में मांग प्रभावित हुई है। व्यापारियों के अनुसार महंगे प्याज के कारण नए ऑर्डर करीब 30 प्रतिशत तक कम हुए हैं। हालांकि, उपलब्ध स्टॉक से फिलहाल बाजार की जरूरत पूरी की जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि नई फसल आने तक कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद कम है। नवंबर के आसपास नई पैदावार आने के बाद ही बाजार में आवक बढ़ने और कीमतों में बदलाव की संभावना है।
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कोटाबाग का प्याज दे रहा मंडी को सहारा
स्थानीय स्तर पर कोटाबाग क्षेत्र से आने वाला प्याज हल्द्वानी मंडी को कुछ राहत दे रहा है। यहां से रोजाना करीब 150 से 200 कट्टे प्याज मंडी पहुंच रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता के चलते कोटाबाग का प्याज तराई से आने वाले प्याज की तुलना में एक से दो रुपये प्रति किलो महंगा है। हालांकि, स्थानीय आवक भी इतनी नहीं है कि बाजार की पूरी मांग पूरी हो सके। कारोबारियों के अनुसार सितंबर से अक्तूबर के बीच कोटाबाग क्षेत्र में प्याज का नया उत्पादन नहीं होता। किसान इस अवधि में उपलब्ध स्टॉक को कीमत बढ़ने की उम्मीद में रोककर रखते हैं। गौलापार से आने वाला हाइब्रिड प्याज भी जून-जुलाई में ही समाप्त हो चुका है। उस समय यह प्याज 15 से 20 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा था।
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रास्ते में जाम से भी प्रभावित हुई आवक
आढ़तियों के अनुसार नासिक, इंदौर और गुजरात से प्याज हल्द्वानी पहुंचने में तीन से चार दिन लगते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान कई मार्गों पर यातायात प्रभावित होने और जाम लगने से भी मंडी तक प्याज की आवक पर असर पड़ा।
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बातचीत
नासिक, इंदौर और गुजरात से प्याज मंडी में पहुंच रहा है। रोजाना दो से तीन गाड़ियां आ रही हैं। दूरी अधिक होने के कारण ट्रकों को हल्द्वानी पहुंचने में तीन से चार दिन लगते हैं। -राजेश मिश्रा, आलू-प्याज आढ़ती
पहले हर रोज पांच से छह ट्रक प्याज लेकर मंडी पहुंच रहे थे। कीमत बढ़ने से मांग में भी करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इसी कारण वाहनों की संख्या भी कम हुई है। - कैलाश जोशी, आलू-प्याज आढ़ती
हल्द्वानी मंडी में प्याज की कीमत एक सप्ताह में 10 से 15 रुपये प्रति किलो बढ़ी है। नई पैदावार आने के बाद ही कीमतों में अंतर आने की उम्मीद है। - संतोष केसरवानी, आलू-प्याज आढ़ती
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अब भी चढ़े हुए हैं चीनी के भाव
गल्ला मंडी में चीनी के थोक भाव भी एक महीने में 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। पहले 46 से 48 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब 61 से 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। थोक व्यापारी रोहित गर्ग के अनुसार मिलों से चीनी के दाम बढ़ने के कारण कीमतों में यह अंतर आया है। इसके अलावा लेबर, भाड़ा, किराया और जीएसटी जुड़ने से थोक कीमत और बढ़ जाती है। गन्ने की पैदावार और खेती का रकबा कम होना भी चीनी के दाम बढ़ने का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। व्यापारी विपिन गुप्ता के अनुसार उत्तराखंड की सरकारी मिलों की चीनी की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम है, जबकि निजी मिलों की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण उनके दाम भी अधिक हैं। हालांकि कीमत बढ़ने के बावजूद बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच फिलहाल कोई बड़ा अंतर नहीं है और कुमाऊं के बाजारों में मांग के अनुरूप पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
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हल्द्वानी मंडी में प्याज की आपूर्ति मुख्य रूप से नासिक, इंदौर और गुजरात से हो रही है। तीनों राज्यों से पहले जहां रोजाना 60 से 72 टन तक प्याज पहुंच रहा था, वहीं अब आवक घटकर करीब 36 से 48 टन प्रतिदिन रह गई है। इन दिनों दो से चार ट्रक ही रोजाना मंडी पहुंच रहे हैं। कारोबारियों के मुताबिक लंबी दूरी और रास्ते में जाम व यातायात संबंधी व्यवधानों का असर भी प्याज की आवक पर पड़ा है।
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तीन राज्यों की आवक पर टिका कुमाऊं
हल्द्वानी मंडी से ही कुमाऊं के सभी जिलों में प्याज की आपूर्ति होती है। आवक घटने और कीमत बढ़ने से बाजार में मांग प्रभावित हुई है। व्यापारियों के अनुसार महंगे प्याज के कारण नए ऑर्डर करीब 30 प्रतिशत तक कम हुए हैं। हालांकि, उपलब्ध स्टॉक से फिलहाल बाजार की जरूरत पूरी की जा रही है। कारोबारियों का कहना है कि नई फसल आने तक कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद कम है। नवंबर के आसपास नई पैदावार आने के बाद ही बाजार में आवक बढ़ने और कीमतों में बदलाव की संभावना है।
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कोटाबाग का प्याज दे रहा मंडी को सहारा
स्थानीय स्तर पर कोटाबाग क्षेत्र से आने वाला प्याज हल्द्वानी मंडी को कुछ राहत दे रहा है। यहां से रोजाना करीब 150 से 200 कट्टे प्याज मंडी पहुंच रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता के चलते कोटाबाग का प्याज तराई से आने वाले प्याज की तुलना में एक से दो रुपये प्रति किलो महंगा है। हालांकि, स्थानीय आवक भी इतनी नहीं है कि बाजार की पूरी मांग पूरी हो सके। कारोबारियों के अनुसार सितंबर से अक्तूबर के बीच कोटाबाग क्षेत्र में प्याज का नया उत्पादन नहीं होता। किसान इस अवधि में उपलब्ध स्टॉक को कीमत बढ़ने की उम्मीद में रोककर रखते हैं। गौलापार से आने वाला हाइब्रिड प्याज भी जून-जुलाई में ही समाप्त हो चुका है। उस समय यह प्याज 15 से 20 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा था।
रास्ते में जाम से भी प्रभावित हुई आवक
आढ़तियों के अनुसार नासिक, इंदौर और गुजरात से प्याज हल्द्वानी पहुंचने में तीन से चार दिन लगते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान कई मार्गों पर यातायात प्रभावित होने और जाम लगने से भी मंडी तक प्याज की आवक पर असर पड़ा।
बातचीत
नासिक, इंदौर और गुजरात से प्याज मंडी में पहुंच रहा है। रोजाना दो से तीन गाड़ियां आ रही हैं। दूरी अधिक होने के कारण ट्रकों को हल्द्वानी पहुंचने में तीन से चार दिन लगते हैं। -राजेश मिश्रा, आलू-प्याज आढ़ती
पहले हर रोज पांच से छह ट्रक प्याज लेकर मंडी पहुंच रहे थे। कीमत बढ़ने से मांग में भी करीब 30 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। इसी कारण वाहनों की संख्या भी कम हुई है। - कैलाश जोशी, आलू-प्याज आढ़ती
हल्द्वानी मंडी में प्याज की कीमत एक सप्ताह में 10 से 15 रुपये प्रति किलो बढ़ी है। नई पैदावार आने के बाद ही कीमतों में अंतर आने की उम्मीद है। - संतोष केसरवानी, आलू-प्याज आढ़ती
अब भी चढ़े हुए हैं चीनी के भाव
गल्ला मंडी में चीनी के थोक भाव भी एक महीने में 15 रुपये प्रति किलो तक बढ़ गए हैं। पहले 46 से 48 रुपये प्रति किलो बिकने वाली चीनी अब 61 से 63 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। थोक व्यापारी रोहित गर्ग के अनुसार मिलों से चीनी के दाम बढ़ने के कारण कीमतों में यह अंतर आया है। इसके अलावा लेबर, भाड़ा, किराया और जीएसटी जुड़ने से थोक कीमत और बढ़ जाती है। गन्ने की पैदावार और खेती का रकबा कम होना भी चीनी के दाम बढ़ने का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। व्यापारी विपिन गुप्ता के अनुसार उत्तराखंड की सरकारी मिलों की चीनी की गुणवत्ता अपेक्षाकृत कम है, जबकि निजी मिलों की गुणवत्ता बेहतर होने के कारण उनके दाम भी अधिक हैं। हालांकि कीमत बढ़ने के बावजूद बाजार में मांग और आपूर्ति के बीच फिलहाल कोई बड़ा अंतर नहीं है और कुमाऊं के बाजारों में मांग के अनुरूप पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।