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इन हालातों पर क्यों न केंद्र पर जुर्माना लगे
लता नेगी, नैनीताल
Updated Thu, 21 Apr 2016 11:05 PM IST
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हाईकोर्ट-1
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट बृहस्पतिवार को कोर्ट में तल्ख नजर आए। उन्होंने देश में व्याप्त भ्रष्टाचार तथा अलोकतांत्रिक तरीके से सत्ता परिवर्तन पर खासे व्यथित दिखाई दिए। अपनी टिप्पणियों में उन्होंने अपने इस व्यथा को खुलकर व्यक्त किया। न्यायमूर्ति पूरे प्रकरण पर इतने व्यथित थे कि उन्होंने केंद्र के वकीलों से यहां तक कहा कि इस प्रकरण पर क्यों न केंद्र पर एक करोड़ का जुर्माना लगाया जाए। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि केंद्र सरकार को निष्पक्ष तथा पारदर्शी होना चाहिए हालांकि इस प्रकरण में ऐसा लग नहीं रहा।
उत्तराखंड की राजनीतिक उठापटक पर दायर याचिका पर लगभग एक माह से चली आ रही सुनवाई पूरी हो जाने के बाद निर्णय सुनाने से पहले मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ ने कोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार अपनी ओर से पहल कर राष्ट्रपति शासन को हटाकर उत्तराखंड में सरकार बनाने का प्रयास करती है तो यह अन्यायपूर्ण तथा दुखद होता। उन्होंने कहा कि उन्हें चिंता है कि केंद्र सरकार इस तरह का बर्ताव करेगी तो स्थितियां कैसी हो जाएंगी। सरकार न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप कर लाभ अर्जित करने की कैसे सोच सकती है।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बिष्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को इस तरह से सत्ता से बेदखल करना अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र पर कुठाराघात है। न्यायमूर्ति पूरे प्रकरण पर इतने व्यथित थे कि उन्होंने केंद्र के वकीलों से यहां तक कहा कि क्या इस प्रकरण पर केंद्र पर एक करोड़ का जुर्माना लगाया जाए। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि केंद्र सरकार को निष्पक्ष तथा पारदर्शी होना चाहिए लेकिन इस प्रकरण में ऐसा लग नहीं रहा।
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स्टिंग ऑपरेशन की सीडी के संबंध में उन्होंने कहा कि यदि इसके आधार पर हॉर्स ट्रेडिंग का मामला बनता भी तो भी फ्लोर टेस्ट 28 मार्च को ही होना चाहिए था लेकिन इससे पूर्व राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन में हरीश रावत के दिखने पर कहा कि भ्रष्टाचार एक अहम मुद्दा है, जिसके हम सख्त खिलाफ हैं और इसके खिलाफ सामूहिक लड़ाई की जरूरत है।
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उत्तराखंड की राजनीतिक उठापटक पर दायर याचिका पर लगभग एक माह से चली आ रही सुनवाई पूरी हो जाने के बाद निर्णय सुनाने से पहले मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ ने कोर्ट में कहा कि केंद्र सरकार अपनी ओर से पहल कर राष्ट्रपति शासन को हटाकर उत्तराखंड में सरकार बनाने का प्रयास करती है तो यह अन्यायपूर्ण तथा दुखद होता। उन्होंने कहा कि उन्हें चिंता है कि केंद्र सरकार इस तरह का बर्ताव करेगी तो स्थितियां कैसी हो जाएंगी। सरकार न्यायालय के कार्य में हस्तक्षेप कर लाभ अर्जित करने की कैसे सोच सकती है।
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मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति बिष्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को इस तरह से सत्ता से बेदखल करना अलोकतांत्रिक और लोकतंत्र पर कुठाराघात है। न्यायमूर्ति पूरे प्रकरण पर इतने व्यथित थे कि उन्होंने केंद्र के वकीलों से यहां तक कहा कि क्या इस प्रकरण पर केंद्र पर एक करोड़ का जुर्माना लगाया जाए। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि केंद्र सरकार को निष्पक्ष तथा पारदर्शी होना चाहिए लेकिन इस प्रकरण में ऐसा लग नहीं रहा।
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स्टिंग ऑपरेशन की सीडी के संबंध में उन्होंने कहा कि यदि इसके आधार पर हॉर्स ट्रेडिंग का मामला बनता भी तो भी फ्लोर टेस्ट 28 मार्च को ही होना चाहिए था लेकिन इससे पूर्व राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। उन्होंने स्टिंग ऑपरेशन में हरीश रावत के दिखने पर कहा कि भ्रष्टाचार एक अहम मुद्दा है, जिसके हम सख्त खिलाफ हैं और इसके खिलाफ सामूहिक लड़ाई की जरूरत है।