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हरिद्वार के चंडीघाट में संचालित बेघर किए गए कुष्ठ रोगियों को कहां बसाया जा रहा है
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने हरिद्वार के चंडीघाट में संचालित सात आश्रमों की स्थिति के बारे में जिला विकास प्राधिकरण हरिद्वार को दो सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने प्राधिकरण से यह भी बताने को कहा है कि क्या ये आश्रम गंगा के तट से दो सौ मीटर दूरी पर स्थित है।
न्यायालय ने सरकार को यह बताने को भी कहा कि कुष्ठ रोगियों के आवास तोड़े जाने के बाद उनको मुआवजा दिया गया है या नहीं और उनको हरिद्वार में कहां पर जगह दी जा रही है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून की एक्ट नाव वेलफेयर सोसाइटी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2017 में हरिद्वार में राष्ट्रपति का दौरा हुआ था जिसके कारण वहां पर रह रहे कुष्ठ रोगियों के आवास डीएम ने तुड़वा दिए थे, जबकि राष्ट्रपति कुष्ठ रोगियों से मिलने आ रहे थे। याचिका में कहा कि तब से उनके पास रहने के लिए आवास तक नही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
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न्यायालय ने सरकार को यह बताने को भी कहा कि कुष्ठ रोगियों के आवास तोड़े जाने के बाद उनको मुआवजा दिया गया है या नहीं और उनको हरिद्वार में कहां पर जगह दी जा रही है।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून की एक्ट नाव वेलफेयर सोसाइटी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2017 में हरिद्वार में राष्ट्रपति का दौरा हुआ था जिसके कारण वहां पर रह रहे कुष्ठ रोगियों के आवास डीएम ने तुड़वा दिए थे, जबकि राष्ट्रपति कुष्ठ रोगियों से मिलने आ रहे थे। याचिका में कहा कि तब से उनके पास रहने के लिए आवास तक नही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए।
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