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कहानी चुनाव की: जब तीनों धार्मिक स्थलों में दर्शन के लिए पहुंचे थे राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह
Sat, 30 Mar 2024 01:33 PM IST
हीरा मेहरा
यामीन अंसारी, संवाद
यामीन अंसारी, संवाद
Published by: हीरा मेहरा
Updated Sat, 30 Mar 2024 01:33 PM IST
सार
जब देश के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने धार्मिक स्थलों के दर्शन में भी गुरुद्वारा, मंदिर और मस्जिद तीनों के दर्शन किए थे। पढ़िए पूरा कहानी...
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ज्ञानी जैल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कई राजनीतिक हस्तियाें के सियासी सफर में काैमी एकता का गुलदस्ता कहे जाने वाले तराई की अहम भूमिका रही हैं। राजनीति के पुरोधाओं ने भी इस गुलदस्ते को हमेशा संजोये रखा। देश के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने धार्मिक स्थलों के दर्शन में भी गुरुद्वारा, मंदिर और मस्जिद तीनों के दर्शन किए थे।
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70 बसंत पार कर चुके वरिष्ठ कांग्रेसी नेता खेड़ा रुद्रपुर निवासी जहांगीर उबैद कुरैशी बताते हैं कि वर्ष 1969 में झा इंटर कालेज में विकास पुरुष के नाम से पहचाने जाने वाले पंडित नारायण दत्त तिवारी आए थे। तिवारी के वक्तव्यों से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा था। कांग्रेस में आए एक साल ही हुआ था कि 70 के दशक में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पंडित गोविंद बल्लभ पंत के बेटे केसी पंत नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव लड़े। उस दौरान तराई क्षेत्र नैनीताल जिले में था। चुनाव प्रचार के साधन बहुत कम थे।
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मतदाताओं तक पहुंचने के लिए पैदल या फिर साइकिल ही सवारी होती थी। सारा दिन डोर-टू-डोर प्रचार करते थे। कभी तो रात गांव में ही बितानी पड़ती थी।