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उत्तराखंड: चारधाम देवस्थानम एक्ट के खिलाफ सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका को हाईकोर्ट में चुनौती

Tue, 26 May 2020 10:47 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 26 May 2020 10:47 PM IST
सार

  • रूलक संस्था देहरादून ने स्वामी की याचिका को निरस्त करने के लिए दिया प्रार्थनापत्र

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Uttarakhand High court: Subramanian Swamy's petition challenged against Chardham Devasthanam Act
- फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

देवस्थानम अधिनियम को सही और विधि सम्मत करार देते हुए रूलक संस्था देहरादून की ओर से नैनीताल हाईकोर्ट में प्रार्थनापत्र दाखिल किया गया है। इसमें अधिनियम को चुनौती देते वाली भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका को निरस्त करने की मांग की गई है।

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स्वामी की याचिका पर पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री, राज्यसभा सांसद व प्रसिद्ध अधिवक्ता सुब्रमण्यम स्वामी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर अधिनियम को चुनौती दी थी। स्वामी ने इस अधिनियम को असंवैधानिक करार देते हुए 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया था, जिसमें कहा गया था कि सरकार मंदिर का प्रबंधन अपने हाथों में नहीं ले सकती है।
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इधर, रूलक संस्था की ओर से प्रार्थनापत्र दाखिल कर अधिनियम को सही करार दिया गया है। इसमें कहा गया है कि सरकार को मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन का अधिकार है। इस अधिनियम से किसी की धार्मिक आजादी के अधिकार का उल्लघंन नहीं होता। इस प्रार्थनापत्र पर जल्द सुनवाई हो सकती है।

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क्या कहा था सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका में

सुब्रमण्यम स्वामी ने 24 फरवरी को सरकार की ओर से बनाए गए देवस्थानम एक्ट के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सिद्धांतों के खिलाफ यदि पार्टी काम करती है तो उसे रास्ते पर लाना कार्यकर्ताओं की प्रमुखता होनी चाहिए।

2014 में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। इसमें कोर्ट ने आदेश दिए थे कि सरकार मंदिरों को अपने हाथों में नहीं ले सकती है लेकिन उसकी वित्तीय व्यवस्थाओं में सुधार जरूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि सरकार का काम मंदिर, मस्जिद, चर्च आदि चलाना नहीं है।

मंदिरों की धनराशि का दुरुपयोग न हो इसके लिए मंदिरों को सरकार नहीं, बल्कि पुजारी और अन्य पदाधिकारी ही चलाएं। पौराणिक मंदिरों के संरक्षण एवं विकास के लिए राज्य सरकार ने जो देवस्थानम एक्ट बनाया है, स्वामी ने उसे निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा था कि सरकार इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

हाईकोर्ट में वादों की पैरवी वीडियो कांफ्रेंसिंग या व्यक्तिगत उपस्थिति से होती रहेगी

हाईकोर्ट के महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कार्यालय ज्ञापन जारी कर कहा है कि हाईकोर्ट में पूर्व की भांति ही वादों की पैरवी वीडियो कांफ्रेंसिंग एवं व्यक्तिगत उपस्थिति के माध्यम से सुविधानुसार संपन्न होगी।

उन्होंने कहा है कि पूर्व में निर्गत आदेश के क्रम में हाईकोर्ट में समस्त वादों की सुनवाई कोविड 19 संक्रमण के फैलाव के कारण 15 अप्रैल से वीडियो कांफ्रेंसिंग एवं व्यक्तिगत उपस्थिति के माध्यम से जारी है। राज्य विधि अधिकारीगण सुविधानुसार हाईकोर्ट में प्रतिदिन निर्धारित वादों की पैरवी वीडियो कांफ्रेंसिंग या व्यक्तिगत उपस्थिति से कर सकते हैं।

ई फाइलिंग के साथ हार्ड कॉपी जमा कराने के मामले में रजिस्ट्रार जनरल से जवाब तलब

लॉकडाउन में अधिवक्ताओं से ई-फाइलिंग के साथ-साथ उसकी हार्ड कॉपी कोर्ट में जमा कराने संबंधित 19 मई के नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता मुकेश रावत ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि रजिस्टार जनरल ने 19 मई को एक नोटिफिकेशन जारी कर अधिवक्ताओं से लॉकडाउन में ई-फाइलिंग के साथ-साथ उसकी हार्ड कॉपी भी फाइल करने को कहा है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि लॉकडाउन में कई अधिवक्ता नैनीताल में नहीं है, जिस कारण वे हाईकोर्ट में ई-फाइलिंग की हार्ड कॉपी जमा नहीं करा सकते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से इस नोटिफिकेशन को संशोधित करने की मांग की गई है।

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