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Uttarakhand: दून में सात हजार पेड़ों के कटान का मामला, हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार से मांगा जवाब

Thu, 23 Jul 2026 10:27 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल Published by: Alka Tyagi Updated Thu, 23 Jul 2026 10:27 PM IST
सार

देहरादून निवासी रेनू पाल ने जनहित याचिका में कहा है कि यमुना वैली, दून घाटी के आशारोड़ी और झाझरा के बीच ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित सड़क निर्माण के लिए एनएचएआई करीब सात हजार पेड़ काटने जा रहा है। इस याचिका पर आज सुनवाई हुई। 

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Uttarakhand High Court seeks response from Centre and State government regarding felling of 7,000 trees
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देहरादून की यमुना वैली, दून घाटी के आशारोड़ी-झाझरा क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क निर्माण परियोजना के लिए करीब सात हजार पेड़ों के कटान को उत्तराखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता को भी दो सप्ताह में प्रति उत्तर दाखिल करने को कहा है।

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मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई। देहरादून निवासी रेनू पाल ने जनहित याचिका में कहा है कि यमुना वैली, दून घाटी के आशारोड़ी और झाझरा के बीच ग्रीन प्रोजेक्ट के तहत प्रस्तावित सड़क निर्माण के लिए एनएचएआई करीब सात हजार पेड़ काटने जा रहा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परियोजना शुरू करने से पहले उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड से आवश्यक अनुमति नहीं ली गई।
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याचिका के अनुसार बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई से पर्यावरण, वन्यजीवों और प्राकृतिक जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस क्षेत्र में पक्षियों की 300 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। यह हाथियों का बफर जोन भी है और यहां स्थित आसन बैराज में हर वर्ष कई देशों से प्रवासी पक्षी पहुंचते हैं। याचिका में कहा गया है कि परियोजना से क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होने की आशंका है।

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