उत्तराखंड: शिक्षकों के तबादलों पर हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई की, सरकार से मांगे दिशा-निर्देश
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने शिक्षकों के वार्षिक तबादलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में आवश्यक दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए समय दे दिया है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ में हुई।
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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने शिक्षकों के वार्षिक तबादलों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से आवश्यक दिशा निर्देश प्राप्त करने के लिए समय दिया है। की। मुख्य न्यायधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 की तिथि नियत की है। जनहित याचिका में मध्य सत्र में शिक्षकों के तबादलों से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक के ग्राम डाभर निवासी जीवन सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शिक्षकों के तबादलों का मामला उठाया था। याचिका में कहा गया कि वार्षिक तबादले की आड़ में मध्य सत्र में शिक्षकों को दूरस्थ क्षेत्रों से सुगम क्षेत्रों में स्थानांतरित किए जाने से इन क्षेत्रों में अध्ययनरत विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।
याचिका में उत्तराखंड वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 का हवाला देते हुए कहा गया है कि अधिनियम की धारा 17 में अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण की प्रक्रिया निर्धारित है। वहीं धारा 23 के तहत वार्षिक तबादलों के लिए समय-सारिणी निर्धारित की गई है, जिसके अनुसार प्रक्रिया 31 मार्च से शुरू होकर 10 जून तक पूरी की जानी है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि मध्य सत्र में तबादलों से दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की शिक्षा प्रभावित होगी।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि बड़ी संख्या में दूरस्थ क्षेत्रों में तैनात शिक्षकों ने सुगम क्षेत्रों में तबादले के लिए विकल्प दिए हैं। कोर्ट के आदेश से विभाग को इन अनुरोधों के आधार पर तबादले के लिए अतिरिक्त समय मिला है। आशंका जताई गई है कि यदि दूरस्थ क्षेत्रों से शिक्षक हटाए गए और उनके स्थान पर शिक्षकों की पारस्परिक या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो वहां पहले से कमजोर शिक्षण व्यवस्था और प्रभावित होगी। राज्य की ओर से अपर महाधिवक्ता ने इस मुद्दे पर सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने मामले को 7 सितंबर को नए सिरे से सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए।