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Uttarakhand: देहरादून में वृक्ष कटाई, शिकायतकर्ताओं के सामाजिक बहिष्कार पर उच्च न्यायालय का राज्य से जवाब तलब

Sun, 07 Jun 2026 12:40 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 07 Jun 2026 12:40 AM IST
सार

अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से पूछा कि ग्रामीणों द्वारा 20 जनवरी को शिकायत दर्ज कराने के बाद क्या कदम उठाए गए।
 

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Uttarakhand: HC seeks state's reply on tree felling in Dehradun, social boycott of complainants
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार को देहरादून के एक गांव में कथित अवैध वृक्ष कटाई और उसके बाद शिकायतकर्ताओं के सामाजिक बहिष्कार से संबंधित शिकायत पर की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण देते हुए दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

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मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने देहरादून के विकासनगर क्षेत्र के ग्राम सभा तौली से संबंधित एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से पूछा कि ग्रामीणों द्वारा 20 जनवरी को शिकायत दर्ज कराने के बाद क्या कदम उठाए गए।
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यह जनहित याचिका ग्राम सभा तौली के छह ग्रामीणों द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जनवरी में उनके गांव में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए, जिसके बाद उन्होंने जांच के लिए वन विभाग के अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कराई।
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याचिकाकर्ताओं के अनुसार, संभागीय वन अधिकारी (डीएफओ) द्वारा की गई जांच में पुष्टि हुई कि 54 पेड़ काटे गए और शाखाओं की अत्यधिक छंटाई के कारण 29 अन्य पेड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा। डीएफओ की रिपोर्ट में पीपल और आम के पेड़ों सहित कई प्रजातियों को हुए नुकसान का उल्लेख किया गया है।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि जांच रिपोर्ट में नुकसान की पुष्टि होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जनहित याचिका में आगे आरोप लगाया गया कि हरे पेड़ों की कटाई का विरोध करने वाले छह ग्रामीणों को सामाजिक बहिष्कार का शिकार बनाया गया। याचिका में कहा गया कि ग्राम सभा में उनके खिलाफ जुर्माना लगाने और ग्राम स्तर पर सामाजिक बहिष्कार आयोजित करने का प्रस्ताव पारित किया गया।


सुनवाई के दौरान, पीठ ने आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उसने राज्य सरकार को प्रारंभिक शिकायत और बाद की जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा उठाए गए कदमों को स्पष्ट करते हुए विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

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