राहत: जंगलों के लिए बारिश बनी वरदान, सुलगने से बचाया, नवंबर 23 से सात मई 2024 तक जला था सात सौ हेक्टेयर जंगल
इस बार मई माह में वर्षा से आम जन को भी राहत है और जंगल भी सुलगने से बच गए। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में आग की घटनाएं बढ़ीं तो सात मई तक आग ने सौ हेक्टेयर से ज्यादा जंगल को झुलसा दिया। वहीं पिछले दस दिन में आग लगने की घटनाएं सामने नहीं आई।
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पिछले साल के मुकाबले इस बार मई माह में ही कुछ-कुछ दिनों के अंतराल में हो रही वर्षा से आम जन को भी राहत है और जंगल भी सुलगने से बच गए। अप्रैल के आखिरी सप्ताह में आग की घटनाएं बढ़ीं तो सात मई तक आग ने सौ हेक्टेयर से ज्यादा जंगल को झुलसा दिया। वहीं पिछले दस दिन में आग लगने की घटनाएं सामने नहीं आई। वर्षा की फुहारों ने जंगल बचाने का काम किया है।
गत वर्षों के मुकाबले इस बार आग की घटनाएं अप्रैल 25 में ही शुरू हो गईं थीं। 15 अप्रैल के बाद तो रामनगर वन प्रभाग के फतेहपुर रेंज के साथ ही नैनीताल प्रभाग के कई रेंज में जंगल जलने शुरू हो गए थे। मई के शुरुआती दो दिनों में काठगोदाम के ऊंचाई वाले क्षेत्र में भी पहाड़ों पर जंगल में आग लगी थी। उस समय वर्षा की कोई संभावना नहीं थी और तपिश बढ़ती चली गई। हालांकि 10 से 12 मई तक एक दो घटनाएं सामने आईं जबकि 12 मई के बाद आग लगने की घटनाओं में कमी आई है। मई के शुरुआती सात दिनों में ही कुमाऊं वन प्रभागों में तकरीबन सौ हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जले थे। यदि वर्षा नहीं होती तो यह रफ्तार बने रहने की आशंका रहती। नवंबर 2024 से सात मई 2025 तक कुमाऊं के जंगलों में आग लगी और सात सौ हेक्टेयर से ज्यादा जंगल जले थे। वन्यजीव आरक्षित क्षेत्र में भी आग की घटनाएं सामने आई थीं। वन प्रभाग तराई पूर्वी के डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा कि वर्षा से जंगलों को काफी राहत मिलती है। नमी बनी रहती है। पिछले दस दिनों में प्रभाग में आग की कोई घटना नहीं हुई है।
पिछले चार साल में आग की घटनाएं
वर्ष - हेक्टेयर
2021 - 3943
2022 - 3425
2023 - 897
2024 - 1771