{"_id":"5d4b2dc58ebc3e6ce212b308","slug":"uproar-of-patients-over-delay-in-making-slip-ramnagar-news-hld352085949","type":"story","status":"publish","title_hn":"पर्ची बनाने में देरी पर मरीजों का हंगामा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पर्ची बनाने में देरी पर मरीजों का हंगामा
विज्ञापन
रामनगर अस्पताल में पर्ची बनाने को लेकर होती नोकझोंक। अमर उजाला
- फोटो : RAMNAGAR
रामनगर (नैनीताल)। 15 संविदा कर्मियों के कार्य बहिष्कार के बाद अस्पताल की वैकल्पिक व्यवस्था पूरी तरह से धड़ाम हो गई है। ऑनलाइन पर्ची बनाना बंद होने के बाद हाथ से पर्ची बनाई जा रही है, लेकिन पर्ची मिलने में देरी होने पर बुधवार को मरीजों ने जमकर हंगामा किया। वहीं, प्रसव के बाद घर जा रहे जच्चा-बच्चा को खुशियों की सवारी नहीं मिली और उन्हें प्राइवेट वाहन से घर जाना पड़ा।
नवीनीकरण एवं चार माह का वेतन दिलाने की मांग को लेकर अस्पताल के संविदा कर्मियों ने पांच अगस्त से कार्य बहिष्कार शुरू किया है और वह अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था तो की, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह धड़ाम हो गई है। बुधवार को पर्ची बनाने को लेकर मरीजों ने जमकर हंगामा कर दिया। वहीं, अस्पताल के नियमित कर्मचारी डबल ड्यूटी कर रहे हैं।
इन कामों पर पड़ रहा असर
1. रजिस्ट्रेशन - ऑनलाइन नहीं हो रहे है, चतुर्थ श्रेणी कर्मी द्वारा बनाए जा रहे पर्चे से मरीजों को हो रही परेशानी।
2. बिलिंग - बिलिंग काउंटर पर कोई कर्मचारी नहीं है।
3. प्लास्टर - प्लास्टर नहीं हो पा रहे है। मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
4. आपातकालीन सेवा - आपातकालीन सेवा में जो फार्मासिस्ट रात 8 से सुबह 8 बजे तक एवं सुबह 2 से रात 8 बजे तक काम करते थे, वो संविदा कर्मचारी है। कार्य बहिष्कार के बाद से यह व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
विज्ञापन
5. वार्ड में नहीं पहुंची दवाइयां - चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पर्ची काटने में लगा दिया गया है, ऐसे में औषधि भंडार से औषधि को प्रत्येक वार्ड में नहीं जा पा रही है।
6. नहीं मिल रही एंबुलेंस - खुशियों की सवारी एंबुलेंस प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को छोड़ने जाती है, इसका चालक संविदा कर्मी है, उसके कार्य बहिष्कार से महिलाओं को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
आखिर 25 दिन क्यों कराया काम : खुल्बे
कार्य बहिष्कार पर बैठे हेमचंद्र खुल्बे ने कहा कि पहले 31 मार्च को संविदा कर्मियों का नवीनीकरण खत्म हो गया था, तब सीएमएस ने चुनाव को देखते हुए तत्कालीन डीएम से तीन माह का नवीनीकरण कराया था। नवीनीकरण 12 अप्रैल से किया, जबकि 11 दिन तक सभी संविदा कर्मियों ने काम किया था, लेकिन 11 दिन का वेतन नहीं दिया गया। अब 12 जुलाई को तीन माह का नवीनीकरण भी खत्म हो गया था, ऐसे में फिर से नया नवीनीकरण कराने को लेकर 25 दिन तक काम कराया। न तो नवीनीकरण किया गया और न चार माह का वेतन ही दिया गया है। जब आउटसोर्स से कर्मचारियों को रखना था तो फिर 25 दिन काम क्यों कराया गया। आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने संविदा कर्मियों का शोषण किया है।
कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठे संविदा कर्मियों को लेकर बृहस्पतिवार को डीएम के समक्ष प्रबंधन समिति की बैठक हो सकती है। फिलहाल अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। -कुमार आदित्य तिवारी, प्रभारी सीएमएस।
विज्ञापन
नवीनीकरण एवं चार माह का वेतन दिलाने की मांग को लेकर अस्पताल के संविदा कर्मियों ने पांच अगस्त से कार्य बहिष्कार शुरू किया है और वह अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए हैं। अस्पताल प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था तो की, लेकिन यह व्यवस्था पूरी तरह धड़ाम हो गई है। बुधवार को पर्ची बनाने को लेकर मरीजों ने जमकर हंगामा कर दिया। वहीं, अस्पताल के नियमित कर्मचारी डबल ड्यूटी कर रहे हैं।
विज्ञापन
इन कामों पर पड़ रहा असर
1. रजिस्ट्रेशन - ऑनलाइन नहीं हो रहे है, चतुर्थ श्रेणी कर्मी द्वारा बनाए जा रहे पर्चे से मरीजों को हो रही परेशानी।
2. बिलिंग - बिलिंग काउंटर पर कोई कर्मचारी नहीं है।
3. प्लास्टर - प्लास्टर नहीं हो पा रहे है। मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है।
4. आपातकालीन सेवा - आपातकालीन सेवा में जो फार्मासिस्ट रात 8 से सुबह 8 बजे तक एवं सुबह 2 से रात 8 बजे तक काम करते थे, वो संविदा कर्मचारी है। कार्य बहिष्कार के बाद से यह व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है।
विज्ञापन
5. वार्ड में नहीं पहुंची दवाइयां - चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पर्ची काटने में लगा दिया गया है, ऐसे में औषधि भंडार से औषधि को प्रत्येक वार्ड में नहीं जा पा रही है।
6. नहीं मिल रही एंबुलेंस - खुशियों की सवारी एंबुलेंस प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को छोड़ने जाती है, इसका चालक संविदा कर्मी है, उसके कार्य बहिष्कार से महिलाओं को यह सुविधा नहीं मिल पा रही है।
आखिर 25 दिन क्यों कराया काम : खुल्बे
कार्य बहिष्कार पर बैठे हेमचंद्र खुल्बे ने कहा कि पहले 31 मार्च को संविदा कर्मियों का नवीनीकरण खत्म हो गया था, तब सीएमएस ने चुनाव को देखते हुए तत्कालीन डीएम से तीन माह का नवीनीकरण कराया था। नवीनीकरण 12 अप्रैल से किया, जबकि 11 दिन तक सभी संविदा कर्मियों ने काम किया था, लेकिन 11 दिन का वेतन नहीं दिया गया। अब 12 जुलाई को तीन माह का नवीनीकरण भी खत्म हो गया था, ऐसे में फिर से नया नवीनीकरण कराने को लेकर 25 दिन तक काम कराया। न तो नवीनीकरण किया गया और न चार माह का वेतन ही दिया गया है। जब आउटसोर्स से कर्मचारियों को रखना था तो फिर 25 दिन काम क्यों कराया गया। आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने संविदा कर्मियों का शोषण किया है।
कार्य बहिष्कार कर धरने पर बैठे संविदा कर्मियों को लेकर बृहस्पतिवार को डीएम के समक्ष प्रबंधन समिति की बैठक हो सकती है। फिलहाल अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। -कुमार आदित्य तिवारी, प्रभारी सीएमएस।