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यूपी पुलिस के सिपाही की गदरपुर में गोली मारकर हत्या
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गदरपुर (ऊधमसिंह नगर)। छुट्टी पर घर आए माधोटांडा पीलीभीत में तैनात यूपी पुलिस के सिपाही की बाइक सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना के वक्त सिपाही अपने साथियों के साथ एक ढाबे में खाना खा रहा था। गोली उसके गर्दन में लगी, जिससे उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सिपाही के साथियों के विरोध करने पर हमलावरों ने एक गोली और दाग दी जिससे वे बाल-बाल बच गए। पुलिस ने सिपाही के शव को 108 से जिला अस्पताल भिजवाया।
जानकारी के अनुसार रामपुर जिले के कोतवाली बिलासपुर क्षेत्र के ग्राम चंदेला निवासी मयंक सिंह (27) पुत्र दयानंद सिंह कुछ दिन पहले अवकाश पर घर आया था। मंगलवार की रात करीब नौ बजे वह साथियों प्रदीप सिंह निवासी रतनपुरा गदरपुर, संदीप सिंह उर्फ बंटी, रविंद्र सिंह और मिंटा निवासी ग्राम पछियापुर, कोतवाली बिलासपुर रामपुर के साथ महतोष के पास प्रेम नगर मोड़ की पुलिया के निकट खालसा ढाबे में खाना खा रहा था। इसी दौरान तीन बाइकों पर छह से अधिक युवक वहां पहुंचे।
इनमें से दो युवक ढाबे के अंदर घुसे और उन्होंने मयंक सिंह पर गोली दाग दी। गोली मयंक की गर्दन में लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मयंक के साथियों ने विरोध किया तो हमलावरों में से एक ने उन पर भी फ ायर झोंक दिया। हालांकि वे बाल-बाल बच गए। इसके बाद हमलावर धमकी देते हुए भाग गए।
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इधर, गोली की आवाज सुनकर ढाबे के कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पहले महतोष पुलिस चौकी से सिपाही और फिर थानाध्यक्ष जसविंदर सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। मयंक के परिवार वाले भी गदरपुर पहुंच गए।
एसएसपी बरिंदरजीत सिंह, एसपी क्राइम प्रमोद कुमार, एसपी काशीपुर डॉ. जगदीश चंद्र, रुद्रपुर से देवेंद्र पींचा भी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ढाबा स्वामी सुरजीत सिंह उर्फ बिट्टू और वहां मौजूद स्टाफ से जानकारी ली। एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने बताया कि मामला जमीनी रंजिश का बताया जा रहा है। जांच की जा रही है और हमलावरों की तलाश में पुलिस की चार टीमों को लगाया गया है।
मां ने गांव के ही एक परिवार पर जताया शक
गदरपुर। घटनास्थल पर पहुंची मयंक सिंह की मां कमलेश ने गांव में ही रहने वाले एक परिवार पर जमीनी विवाद को लेकर हत्या करने का शक जताया है। उसने यह भी आरोप लगाया कि मयंक की हत्या के पीछे गहरी साजिश है। उसको एक सुनियोजित तरीके से ढाबे पर लाया गया।
दो साल पहले भर्ती हुआ था मयंक
गदरपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस में दो साल पहले बतौर सिपाही भर्ती हुआ मयंक सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उसके बड़े भाई नितेश एवं अखिलेश बाहर रहकर नौकरी करते हैं। मयंक सिंह के पिता दयानंद सिंह की छह साल पहले मौत हो चुकी है। दयानंद भी पुलिस में थे।
फेसबुक पर पोस्ट का विवाद तो नहीं
गदरपुर। मयंक सिंह की हत्या के पीछे परिवार वाले जमीनी रंजिश की बात बता रहे हैं लेकिन कुछ लोगों का ये भी कहना था कि फेसबुक पर एक पोस्ट को लेकर मयंक का कुछ लोगों से विवाद हुआ था। इस विवाद के चलते हत्या होने का भी कयास लगाया जा रहा है।
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जानकारी के अनुसार रामपुर जिले के कोतवाली बिलासपुर क्षेत्र के ग्राम चंदेला निवासी मयंक सिंह (27) पुत्र दयानंद सिंह कुछ दिन पहले अवकाश पर घर आया था। मंगलवार की रात करीब नौ बजे वह साथियों प्रदीप सिंह निवासी रतनपुरा गदरपुर, संदीप सिंह उर्फ बंटी, रविंद्र सिंह और मिंटा निवासी ग्राम पछियापुर, कोतवाली बिलासपुर रामपुर के साथ महतोष के पास प्रेम नगर मोड़ की पुलिया के निकट खालसा ढाबे में खाना खा रहा था। इसी दौरान तीन बाइकों पर छह से अधिक युवक वहां पहुंचे।
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इनमें से दो युवक ढाबे के अंदर घुसे और उन्होंने मयंक सिंह पर गोली दाग दी। गोली मयंक की गर्दन में लगी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मयंक के साथियों ने विरोध किया तो हमलावरों में से एक ने उन पर भी फ ायर झोंक दिया। हालांकि वे बाल-बाल बच गए। इसके बाद हमलावर धमकी देते हुए भाग गए।
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इधर, गोली की आवाज सुनकर ढाबे के कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पहले महतोष पुलिस चौकी से सिपाही और फिर थानाध्यक्ष जसविंदर सिंह पुलिस बल के साथ पहुंचे। मयंक के परिवार वाले भी गदरपुर पहुंच गए।
एसएसपी बरिंदरजीत सिंह, एसपी क्राइम प्रमोद कुमार, एसपी काशीपुर डॉ. जगदीश चंद्र, रुद्रपुर से देवेंद्र पींचा भी दलबल के साथ मौके पर पहुंच गए। उन्होंने ढाबा स्वामी सुरजीत सिंह उर्फ बिट्टू और वहां मौजूद स्टाफ से जानकारी ली। एसएसपी बरिंदरजीत सिंह ने बताया कि मामला जमीनी रंजिश का बताया जा रहा है। जांच की जा रही है और हमलावरों की तलाश में पुलिस की चार टीमों को लगाया गया है।
मां ने गांव के ही एक परिवार पर जताया शक
गदरपुर। घटनास्थल पर पहुंची मयंक सिंह की मां कमलेश ने गांव में ही रहने वाले एक परिवार पर जमीनी विवाद को लेकर हत्या करने का शक जताया है। उसने यह भी आरोप लगाया कि मयंक की हत्या के पीछे गहरी साजिश है। उसको एक सुनियोजित तरीके से ढाबे पर लाया गया।
दो साल पहले भर्ती हुआ था मयंक
गदरपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस में दो साल पहले बतौर सिपाही भर्ती हुआ मयंक सिंह तीन भाइयों में सबसे छोटा था। उसके बड़े भाई नितेश एवं अखिलेश बाहर रहकर नौकरी करते हैं। मयंक सिंह के पिता दयानंद सिंह की छह साल पहले मौत हो चुकी है। दयानंद भी पुलिस में थे।
फेसबुक पर पोस्ट का विवाद तो नहीं
गदरपुर। मयंक सिंह की हत्या के पीछे परिवार वाले जमीनी रंजिश की बात बता रहे हैं लेकिन कुछ लोगों का ये भी कहना था कि फेसबुक पर एक पोस्ट को लेकर मयंक का कुछ लोगों से विवाद हुआ था। इस विवाद के चलते हत्या होने का भी कयास लगाया जा रहा है।