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विवि में आंदोलन कर रहे यूओयू कर्मचारियों को उठाया, अन्य जगह धरना देने से पहले धरना स्थगित
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हल्द्वानी। दो सप्ताह से वेतन, नियमित नियुक्ति और कर्मचारियों के पद भरने की मांग को लेकर उत्तराखंड मुक्त विवि में धरना प्रदर्शन कर रहे शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मंगलवार को पुलिस प्रशासन की मदद से धरना स्थल से उठा दिया गया है। हालांकि कर्मचारियों ने कुछ देर इसका विरोध किया। उन्हें विवि से बाहर आंदोलन जारी रखने को बोला गया, लेकिन वह इस बारे में सही से निर्णय नहीं ले पाए। आखिरकार विवि प्रशासन, जिला प्रशासन से हुई वार्ता के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन से अपने पांव खींच लिए। इसके बाद कर्मचारी काम पर लौट आए।
बीते सोमवार को विवि प्रशासन ने कार्य बहिष्कार पर बैठे कर्मचारियों के खिलाफ नो वर्क नो पे का आदेश जारी किया था। मंगलवार को एक बार फिर कर्मचारियों ने विवि के प्रशासनिक भवन में धरना-प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इस बीच सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस भी मौजूद रही। दिन के समय अचानक कर्मचारियों को धरना स्थल से उठाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कुलसचिव डॉ. पीडी पंत और नायब तहसीलदार हरीश चंद्र बुद्धिष्ठ ने कर्मचारियों से वार्ता की। उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। इस बीच शिक्षक संघ अध्यक्ष भूपेन सिंह और कर्मचारी संघ अध्यक्ष राजेश आर्या ने कर्मचारियों के मुद्दों को कुलसचिव और नायब तहसीलदार के आगे रखा। इस दौरान दोनों पक्षों में देर तक गहमागहमी चलती रही। कर्मचारी आंदोलन से पीछे हटने के बजाए जेल जाने पर अड़ गए। इसके बाद पुलिस बल वाहन लेकर विवि परिसर में पहुंच गया। दूसरे दौर की वार्ता के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन को 11 मार्च तक स्थगित करने का निर्णय लिया। कहा कि कार्यपरिषद की बैठक में यदि उनके पक्ष में काई निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
नायब तहसीलदार हरीश चंद्र बुद्धिष्ठ और थाना प्रभारी हरेंद्र चौधरी ने बताया कि विवि के पत्र के आधार पर कार्यवाही की गई है। विवि में परीक्षाओं के चलते धारा 144 लागू है। ऐसे में विवि के भीतर किसी प्रकार का धरना प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। वैधानिक कार्यवाही के अनुसार कर्मचारियों को उठने के लिए कहा गया।
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कार्यपरिषद की बैठक में रखी जाएंगी कर्मचारियों की मांगें
कुलसचिव डॉ. पीडी पंत ने कहा कि विवि में परीक्षाओं के चलते धारा 144 लागू है। ऐसे में कर्मचारियों की ओर से किया जा रहा आंदोलन वैधानिक नहीं है। उन्हें किसी अन्य जगह आंदोलन करने का सुझाव दिया गया था। सोमवार को इस संबंध में एक ओदश भी जारी किया जा चुका है। इसके बाद भी कर्मचारियों ने मंगलवार को आंदोलन जारी रखा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी जिन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनमें कुछ को शासन ने रद्द कर दिया है। आठ मार्च को विवि कार्यपरिषद की बैठक है। इसमें कर्मचारियों के मुद्दों को रखा जाएगा।
काम पर लौटने से विद्यार्थियों को मिलेगी मदद
विगत दो सप्ताह से उत्तराखंड मुक्त विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर हैं। उनकी ओर से विवि संबंधी काई कार्य नहीं किए गए। इस बीच विद्यार्थियों को प्रवेश और किताओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनके विवि से संबंधित कार्य नहीं पाए। मंगलवार को कर्मचारियों ने धरना स्थगित कर काम पर लौटने का निर्णय लिया।
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बीते सोमवार को विवि प्रशासन ने कार्य बहिष्कार पर बैठे कर्मचारियों के खिलाफ नो वर्क नो पे का आदेश जारी किया था। मंगलवार को एक बार फिर कर्मचारियों ने विवि के प्रशासनिक भवन में धरना-प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इस बीच सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस भी मौजूद रही। दिन के समय अचानक कर्मचारियों को धरना स्थल से उठाने का निर्णय लिया गया। इसके बाद कुलसचिव डॉ. पीडी पंत और नायब तहसीलदार हरीश चंद्र बुद्धिष्ठ ने कर्मचारियों से वार्ता की। उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। इस बीच शिक्षक संघ अध्यक्ष भूपेन सिंह और कर्मचारी संघ अध्यक्ष राजेश आर्या ने कर्मचारियों के मुद्दों को कुलसचिव और नायब तहसीलदार के आगे रखा। इस दौरान दोनों पक्षों में देर तक गहमागहमी चलती रही। कर्मचारी आंदोलन से पीछे हटने के बजाए जेल जाने पर अड़ गए। इसके बाद पुलिस बल वाहन लेकर विवि परिसर में पहुंच गया। दूसरे दौर की वार्ता के बाद कर्मचारियों ने आंदोलन को 11 मार्च तक स्थगित करने का निर्णय लिया। कहा कि कार्यपरिषद की बैठक में यदि उनके पक्ष में काई निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन दोबारा शुरू किया जाएगा।
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नायब तहसीलदार हरीश चंद्र बुद्धिष्ठ और थाना प्रभारी हरेंद्र चौधरी ने बताया कि विवि के पत्र के आधार पर कार्यवाही की गई है। विवि में परीक्षाओं के चलते धारा 144 लागू है। ऐसे में विवि के भीतर किसी प्रकार का धरना प्रदर्शन नहीं किया जा सकता है। वैधानिक कार्यवाही के अनुसार कर्मचारियों को उठने के लिए कहा गया।
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कार्यपरिषद की बैठक में रखी जाएंगी कर्मचारियों की मांगें
कुलसचिव डॉ. पीडी पंत ने कहा कि विवि में परीक्षाओं के चलते धारा 144 लागू है। ऐसे में कर्मचारियों की ओर से किया जा रहा आंदोलन वैधानिक नहीं है। उन्हें किसी अन्य जगह आंदोलन करने का सुझाव दिया गया था। सोमवार को इस संबंध में एक ओदश भी जारी किया जा चुका है। इसके बाद भी कर्मचारियों ने मंगलवार को आंदोलन जारी रखा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी जिन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनमें कुछ को शासन ने रद्द कर दिया है। आठ मार्च को विवि कार्यपरिषद की बैठक है। इसमें कर्मचारियों के मुद्दों को रखा जाएगा।
काम पर लौटने से विद्यार्थियों को मिलेगी मदद
विगत दो सप्ताह से उत्तराखंड मुक्त विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारी कार्य बहिष्कार पर हैं। उनकी ओर से विवि संबंधी काई कार्य नहीं किए गए। इस बीच विद्यार्थियों को प्रवेश और किताओं को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनके विवि से संबंधित कार्य नहीं पाए। मंगलवार को कर्मचारियों ने धरना स्थगित कर काम पर लौटने का निर्णय लिया।