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Nainital News: झील के पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार के लिए आज से निकाली जाएंगी अनुपयोगी मछलियां
Sat, 02 Sep 2023 01:45 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 02 Sep 2023 01:45 AM IST
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नैनीझील की सेहत के लिए खतरा बन रही अनुपयोगी प्रजाति की मछलियों को निकलाने के लिए शुक्रवार की शा
नैनीताल। नैनीझील के पारिस्थितिकीय तंत्र में सुधार के लिए आज से झील में मौजूद अनुपयोगी प्रजाति और अधिक उम्र की मछलियों को निकाला जाएगा। मछलियों को निकालने के लिए शुक्रवार देर शाम झील में जाल डाल दिया गया।
वर्तमान में नैनीझील में विभिन्न प्रजातियों की मछलियां मौजूद हैं। इनमें से कॉमन कार्प व बिग हेड प्रजाति की मछलियों की तादाद तेजी से बढ़ी है। इससे झील का पारिस्थतिकीय तंत्र बिगड़ रहा है। 11 सितंबर तक मछलियां निकालने का कार्य जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय का मत्स्य विज्ञान विभाग करेगा। इस कार्य के लिए प्राधिकरण ने 26 लाख 45 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। वहीं प्राधिकरण की ओर से संचालित एरियेशन ऑक्सीजन प्लांट के प्रभारी आनंद सिंह कोरंगा ने बताया कि नैनीझील से अनुपयोगी मछलियों को निकालने के लिए शुक्रवार देर शाम झील में जाल डाल दिया है।
झील का पारिस्थितिकीय तंत्र सुधारना जरूरी : डॉ. मिश्रा
नैनीताल। पंतनगर विवि के मतस्य विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि नैनीझील में कॉमन कार्प और बिग हेड प्रजाति की मछलियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे झील का पारिस्थितिकीय तंत्र बिगड़ रहा है। बताया कि इस प्रजाति की मछलियां भोजन की तलाश में झील किनारे स्थित मिट्टी को कुरेदती हैं जिससे झील की सुरक्षा दीवार कमजोर हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि इन मछलियों की बढ़ती संख्या से झील में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा बढ़ रही है जो झील की सेहत के लिए ठीक नहीं है।
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वर्तमान में नैनीझील में विभिन्न प्रजातियों की मछलियां मौजूद हैं। इनमें से कॉमन कार्प व बिग हेड प्रजाति की मछलियों की तादाद तेजी से बढ़ी है। इससे झील का पारिस्थतिकीय तंत्र बिगड़ रहा है। 11 सितंबर तक मछलियां निकालने का कार्य जीबी पंत कृषि विश्वविद्यालय का मत्स्य विज्ञान विभाग करेगा। इस कार्य के लिए प्राधिकरण ने 26 लाख 45 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की है। वहीं प्राधिकरण की ओर से संचालित एरियेशन ऑक्सीजन प्लांट के प्रभारी आनंद सिंह कोरंगा ने बताया कि नैनीझील से अनुपयोगी मछलियों को निकालने के लिए शुक्रवार देर शाम झील में जाल डाल दिया है।
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झील का पारिस्थितिकीय तंत्र सुधारना जरूरी : डॉ. मिश्रा
नैनीताल। पंतनगर विवि के मतस्य विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष मिश्रा ने बताया कि नैनीझील में कॉमन कार्प और बिग हेड प्रजाति की मछलियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। इससे झील का पारिस्थितिकीय तंत्र बिगड़ रहा है। बताया कि इस प्रजाति की मछलियां भोजन की तलाश में झील किनारे स्थित मिट्टी को कुरेदती हैं जिससे झील की सुरक्षा दीवार कमजोर हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि इन मछलियों की बढ़ती संख्या से झील में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा बढ़ रही है जो झील की सेहत के लिए ठीक नहीं है।
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