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हल्द्वानी के दो युवा इंजीनियरों का अमेरिका में डंका
अमरनाथ।
Updated Tue, 02 May 2017 02:33 AM IST
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प्रतीकात्मक फोटो
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की परदेसी युवाओं को रोकने की कोशिश के बावजूद हल्द्वानी के युवा भी अमेरिका में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। हल्द्वानी के गौरव मिश्रा को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में गूगल के प्रोजेक्ट हेड का पद मिला है तो उनके भाई अनुराग मिश्रा को ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी एमेजॉन में प्रोग्राम हेड की जिम्मेदारी मिली है।
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हल्द्वानी एमबी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे डॉ. गणेश मिश्रा ने खुद डीलिट की उपाधि हासिल कर अपने दो बेटों को अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में प्रमुख पदों पर पहुंचाया है।
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उत्तराखंड संपत्ति विभाग के मुख्य व्यवस्था अधिकारी रहे हल्द्वानी निवासी डॉ. गणेश मिश्रा ने बताया कि उनके 32 साल के बेटे गौरव मिश्रा को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में बहुराष्ट्रीय सॉफ्टवेयर कंपनी गूगल के प्रोजेक्ट हेड की जिम्मेदारी मिली है।
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नैनीताल के सेंट जोसेफ कॉलेज से सीनियर सेकेंडरी और फिर अमेरिका की टेक्सास यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद इस युवा इंजीनियर को याहू और डिजिलैंट में भी काम करने का मौका मिल चुका है। अब उनको गूगल में डेढ़ करोड़ रुपये सालाना का पैकेज मिला है।
गौरव के ही छोटे भाई अनुराग मिश्रा को ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी एमेजॉन में प्रोग्राम हेड का दायित्व मिला है। उन्हें कंपनी ने दो करोड़ सालाना का पैकेज दिया है। अनुराग ने भी सेंट जोसेफ नैनीताल से पढ़ने के बाद टेक्सास यूनिवर्सिटी से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
अब 30 साल की उम्र में उन्हें बड़ा पैकेज मिला है। अनुराग को 18 साल की उम्र में ही आईआईटीयंस और नॉन आईआईटीयंस के बीच हुई प्रतियोगिता में देश में चैंपियन चुना गया था। उसी समय मॉइक्रोसॉफ्ट इंडिया ने अनुराग को नौकरी का बड़ा ऑफर दिया था।
गौरव और अनुराग को अब ग्रीन कार्ड भी मिलने वाला है। इनका सबसे छोटा भाई वरुण मिश्रा भी सेन होजे यूनिवर्सिटी कैलिफोर्निया में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है।
डॉ. गणेश मिश्रा के 93 वर्षीय पिता श्रीनिवास मिश्रा हल्द्वानी में जानेमाने योग गुरु हैं। उनकी पत्नी डॉ. प्रतिभा मिश्रा एक्साइज विभाग में संयुक्त आयुक्त रह चुकी हैं। डॉ. गणेश मिश्रा खुद टूरिज्म एंड नेशनल इंटिग्रेशन पुस्तक लिख चुके हैं।
वह एमबीपीजी कॉलेज हल्द्वानी में 1970 में छात्र संघ के अध्यक्ष रहे और तीन बार नैनीताल यूनिवर्सिटी की कार्य परिषद के सदस्य भी रहे।
गौरव की वजह से दो जेनरेशन गौरवान्वित
गूगल ने विगत माह गौरव मिश्रा जैसी प्रतिभा देने के लिए उनके पिता डा. गणेश मिश्रा और बाबा पंडित श्रीनिवास मिश्रा को सेनफ्रांसिस्को के पास माउंटेन व्यू स्थित मुख्यालय बुलाकर सम्मानित किया।
डा. मिश्रा का कहना है कि उनके बेटे की वजह से ही अमेरिका में दो जेनरेशन को सम्मानित और गौरवान्वित होने का मौका मिला है। डा. मिश्रा राज्य संपत्ति विभाग से सेवानिवृत्त होने के बाद छत्तीसगढ़ स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी में हाउस मैनेजर के पद पर दिल्ली में कार्यरत हैं।
गौरव ने भी किया था ट्रंप की नीति का विरोध
पिता की तरह गौरव में भी नेतृत्व की क्षमता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की एचवनबी वीजा नियमों को कड़ा करने की नीति का हाल ही में गूगल हेडक्वार्टर में विरोध हुआ था, जिसमें काफी संख्या में भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने हिस्सा लिया था। ट्रंप की नीति से बेखौफ गौरव का कहना है कि इस नीति से भारतीय पेशेवरों को अलग रखना जाना चाहिए।