{"_id":"56f5926a4f1c1ba905f14d5c","slug":"two-employees-trust-accounts-8000","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो कर्मचारियों के भरोसे 8000 खाते","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो कर्मचारियों के भरोसे 8000 खाते
धन सिंह बिष्ट/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
Updated Sat, 26 Mar 2016 01:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हल्द्वानी। ब्रिटिशकाल से लोगों को अपनी सेवा देने वाला मंगल पड़ाव का डाकघर समय बदलने के बाद भी संसाधनों की बाट जोह रहा है, बाजार में होने के कारण हजारों व्यापारी इस डाकघर पर निर्भर हैं, लेकिन इसके संचालन के लिए न तो डाकघर में पूरा स्टाफ है न ही संसाधन। सारा कामकाज महज दो कर्मचारियों के भरोसे है।
विज्ञापन
पूर्व में मंगल पड़ाव में व्यापारियों की पैठ बाजार लगने के कारण इसे पैठ पड़ाव के नाम से जाना जाता था। व्यापारियों की मांग पर यहां डाकघर की स्थापना की गई। मंगल के दिन बाजार होने के कारण बाद में इसे मंगल पड़ाव के नाम से जाना जाने लगा। डाकघर के बाहर लगे बोर्ड में आज भी पैठपड़ाव अंकित है।
विज्ञापन
समय के साथ पैठ बाजार खत्म हो गयी और व्यापारी यहीं पर स्थापित हो गये। आज हजारों व्यापारी इस क्षेत्र में अपना व्यापार चला रहे हैं। इसमें से सैकड़ों व्यापारियों के खातों का संचालन इसी डाकघर से होता है। प्रधान डाकघर के बाद इसी डाकघर में सबसे अधिक काम होता है।
विज्ञापन
उसके बाद भी यह उपेक्षा का शिकार है। वर्तमान में डाकघर में एक पोस्टमास्टर और एक डाक सहायक है, जबकि यहां हर रोज औसतन 50 स्पीड पोस्ट, 100 साधारण डाक, 50 रजिस्ट्री, 400 बचत खातों का लेनदेन, 50 एनएससी, 20 किसान विकास पत्र बनाने का काम होता है। यहां आठ हजार से अधिक खाते हैं।
मंगल पड़ाव में नगर निगम की पुरानी दुकान में बने डाकघर को ढूंढना भी कोई आसान काम नहीं है। फल मंडी के पीछे मीरा मार्ग में बना यह डाकघर तीन तरफ से दुकानों से घिरा है।सामने फल वालों के ठेलों से गेट नजर नहीं आता। गेट मिल जाये तो अंदर जाने को रास्ता ढूंढना पड़ता है। दुपहिया वाहन वालों के लिए तो डाकघर में जाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
मंगल पड़ाव के डाकघर में रोजाना होने वाले काम के हिसाब से यहां पर एक बाबू और चपरासी की जरूरत है, लेकिन यहां एक पोस्टमास्टर और एक डाक सहायक ही तैनात है। दोनों को ही सारे काम करने होते हैं। काम की अधिकता से दोनों कर्मचारियों को छुट्टी लेने में भी मुश्किल होती है। जल्द ही डाकघर को सीवीएस किया जाना है ऐसे में कर्मचारियों का अभाव डाकघर के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है।